लखनऊ/हरिद्वार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा था, जब देश की महान विरासत को कोसा जाता था, उसे अपमानित और लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं और यह केवल किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अपमान था। इसके दुष्परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश अराजकता, लूट और दंगों का अड्डा बन गया था। गुंडागर्दी चरम पर थी, न बेटियां सुरक्षित थीं और न ही व्यापारी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी सरकार में विरासत को सम्मान मिला, तो प्रदेश में सुरक्षा का वातावरण बना, बेटियां सुरक्षित हुईं और व्यापारियों को भी निर्भय माहौल मिला। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद, न गुंडागर्दी। न कर्फ्यू है, न दंगे हैं। यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई दोनों गायब हो चुके हैं और कर्फ्यू अब दंगाइयों पर लगता है। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि सरकार की नीति स्पष्ट और नीयत साफ रही। उन्होंने कहा कि क्या कोई कल्पना कर सकता था कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा, लेकिन आज वह सपना साकार हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के वह उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को कैसे चला रहे हैं। इस पर उनका उत्तर होता है कि वह आश्रम व्यवस्था से जुड़े रहे हैं। प्रशासन और प्रबंधन का वास्तविक ज्ञान भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलता है। भारत का संन्यासी आश्रम परंपरा से ही नेतृत्व और अनुशासन सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों और जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा भारतीय आश्रम पद्धति में निहित है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें आश्रम और गुरुकुल परंपरा में रही हैं, जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प और प्रशासन जैसे विषयों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जहां पहले अव्यवस्था दिखाई देती थी, वहीं आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बन चुके हैं। भारत को शक्ति इन्हीं आस्था स्थलों से मिलती है। जब इन केंद्रों को सम्मान और संरक्षण मिला, तो उसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए। लंबे समय तक बीमारू राज्य कहलाने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की अर्थव्यवस्था के लिए ब्रेकथ्रू बनकर निरंतर प्रगति कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जन्म देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का आयोजन हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सर संघचालक बालासाहब देवरस की उपस्थिति रही थी। यह इस बात का प्रतीक था कि राष्ट्र के प्रति सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन मूल्यों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। विपरीत परिस्थितियों में भी स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने भारत माता मंदिर के निर्माण के माध्यम से देश को आध्यात्मिक नेतृत्व का स्थायी स्मारक दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार स्तंभ हैं। हरिद्वार आते समय बचपन से ही मन में हरि की पैड़ी में स्नान और भारत माता मंदिर के दर्शन की भावना रहती थी। यहां न जाति का भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरे देश का स्वरूप प्रतिबिंबित होता है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश ने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी, बदरीनाथ और हरिद्वार तक विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए आगे बढ़ी है। यह नए भारत के निर्माण की वही गाथा है, जिसका इंतजार वर्तमान पीढ़ी सदियों से कर रही थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित एक राष्ट्र है। भारत की आत्मा धर्म में निहित है और जहां धर्म है, वहीं विजय है। इतिहास गवाह है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न वर्तमान को सुधार सकता है और न भविष्य को सुरक्षित रख सकता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है।
आक्रांताओं के आने से पहले भारत एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र था, जिसकी नींव ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता पर टिकी थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत तक रही और 400 वर्ष पहले भी यह 25 प्रतिशत थी। यह सामर्थ्य हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और आत्मनिर्भर व्यवस्था का परिणाम था। जैसे ही हम इन मूल्यों से दूर हुए, पतन शुरू हो गया। लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत फिर से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने ग्राम स्वराज की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि गांव आत्मनिर्भर इकाइयां थीं, जहां कृषि, पशुपालन और हस्तशिल्प फलते-फूलते थे। स्वरोजगार भारत की मूल शक्ति था और भारतीय नारी अर्थव्यवस्था की सक्रिय भागीदार थी। आश्रम और गुरुकुल परंपरा से विमुख होने के कारण ही यह व्यवस्था कमजोर हुई, जिसे फिर से सशक्त करना आवश्यक है।
इस समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी उपस्थित रहे।
