लखनऊ। बजट सत्र 2026-27 के दसवें दिन उत्तर प्रदेश विधान सभा में कांग्रेस ने युवाओं की बेरोजगारी और आउटसोर्सिंग आधारित नौकरियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता Aradhana Mishra Mona ने बजट पर चर्चा के दौरान सरकार को घेरते हुए कहा कि बजट का आकार बढ़ाना मात्र दिखावा है, जब खर्च ही नहीं हो पा रहा तो बड़े आंकड़ों से प्रदेश की जनता को कोई लाभ नहीं होने वाला।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने लगभग 9 लाख 13 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है, जबकि 2025-26 में 8 लाख 8736 करोड़ रुपये का मूल बजट और 24 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट मिलाकर कुल राशि लगभग 8 लाख 33 हजार करोड़ रही। इसके बावजूद योजनाओं की स्वीकृति और व्यय प्रतिशत बेहद कम रहा। जनवरी तक खर्च लगभग 4 लाख 17 हजार करोड़ और फरवरी तक करीब 4 लाख 28 हजार करोड़ बताया गया, जो कुल बजट का लगभग आधा है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में बजट का आकार डेढ़ गुना बढ़ाया गया, लेकिन वास्तविक व्यय लगभग उसी स्तर पर है, जिस स्तर पर 2021-22 में था।
राजस्व प्राप्ति पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 2025-26 में विभिन्न करों से लगभग 6.66 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में घटाकर 5.83 लाख करोड़ कर दिया गया। 2026-27 के लिए 7.32 लाख करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उनका आरोप था कि वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे कमिटेड खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है, जबकि रिक्त पदों पर भर्ती न होने से वास्तविक वेतन व्यय कम हो रहा है।
प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर उन्होंने कहा कि 2020-21 में राज्य का कर्ज 5.64 लाख करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर 8.46 लाख करोड़ से अधिक हो गया। उनके अनुसार प्रति व्यक्ति लगभग 37,500 रुपये का कर्ज प्रदेशवासियों पर है।
युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि हर वर्ष लाखों छात्र बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों से निकलकर रोजगार की तलाश में आते हैं, लेकिन अधिकांश को 8 से 12 हजार रुपये की आउटसोर्सिंग या कॉन्ट्रैक्ट आधारित नौकरियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहां सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व का अभाव है। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत मजदूरी समीक्षा पर भी प्रश्न उठाया और पूछा कि पिछले नौ वर्षों में कितनी बार समीक्षा की गई।
उन्होंने सरकार के निवेश और रोजगार दावों पर सवाल करते हुए कहा कि यदि प्रदेश में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित हो रहे हैं, तो श्रमिकों को विदेश क्यों भेजा जा रहा है। आउटसोर्सिंग निगम गठन की घोषणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूछा कि इस पर अब तक क्या प्रगति हुई।
विभागीय व्यय का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, महिला कल्याण, बेसिक शिक्षा, ग्राम विकास और पशुधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया। उन्होंने मनरेगा में राज्य अंश की स्पष्टता, दैनिक मजदूरी दर और पंचायतों की भूमिका सीमित किए जाने पर भी सरकार को घेरा।
पीपीपी मॉडल के बढ़ते प्रयोग पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है और लोक कल्याण की जिम्मेदारियों से पीछे हट रही है। परिवहन, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि केवल भवन निर्माण से उपलब्धि नहीं मानी जा सकती, बल्कि पर्याप्त डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
कांग्रेस ने सदन में मांग की कि युवाओं को स्थायी रोजगार, सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए ठोस नीति बनाई जाए तथा रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
