लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके स्वयं के भवनों में संचालित करने हेतु विस्तृत एवं चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र प्री-प्राइमरी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। अतः इन केंद्रों को सुरक्षित, आकर्षक और बाल-मित्र वातावरण में विकसित करते हुए उत्कृष्ट पठन-पाठन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है, उनके निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए। इस कार्य के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से सहयोग लिया जाए, साथ ही राज्य सरकार भी आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री ने प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल पर विचार करते हुए एक मानक डिजाइन विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में ही आंगनबाड़ी भवन विकसित किए जाएं, ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों, गर्भवती माताओं तथा स्थानीय समुदाय को सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी की मजबूत नींव बताया।
राज्य सरकार आंगनबाड़ी ढांचे के समग्र रूपांतरण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह पहल ‘स्वस्थ बचपन–समर्थ उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्य को नई गति प्रदान करेगी।
