तेहरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन की खबरों के बाद देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन संभावित नए सुप्रीम लीडर को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में मंथन शुरू हो गया है।
कैसे होता है सुप्रीम लीडर का चयन?
ईरान के संविधान के अनुसार, 88 वरिष्ठ इस्लामी विद्वानों की संस्था ‘Assembly of Experts’ (विशेषज्ञों की सभा) नए सर्वोच्च नेता के चयन के लिए जिम्मेदार होती है। इस निकाय के सदस्यों को ‘Guardian Council’ से अनुमोदन प्राप्त होता है।
यदि सुप्रीम लीडर का पद रिक्त हो जाए या वे अपने दायित्व निभाने में असमर्थ हों, तो यही संस्था नए नेता के चयन की प्रक्रिया आरंभ करती है। ईरान में पहले से कोई औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया जाता, इसलिए किसी एक नाम की निश्चितता नहीं मानी जाती।
संभावित दावेदारों पर नजर
उत्तराधिकार की अटकलों के बीच कुछ प्रमुख धार्मिक एवं राजनीतिक हस्तियों के नाम चर्चा में हैं:
- मोहसेन कोमी – खामेनेई के करीबी माने जाने वाले कोमी की धार्मिक प्रतिष्ठान और सत्ता संरचना में गहरी पैठ है। उन्हें निरंतरता बनाए रखने वाले चेहरे के रूप में देखा जाता है।
- मोहसेन अराकी – लंबे समय से विशेषज्ञों की सभा के सदस्य रहे अराकी को संस्थागत अनुभव और रूढ़िवादी धड़े में मजबूत पकड़ के कारण प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
- अलीरेजा अराफी – विशेषज्ञों की सभा और गार्जियन काउंसिल में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके अराफी ईरान की मदरसा प्रणाली के प्रमुख भी हैं और धार्मिक मामलों में उनकी विश्वसनीयता मानी जाती है।
- हाशेम हुसैनी बुशेहरी – विशेषज्ञों की सभा के सदस्य बुशेहरी धार्मिक प्रतिष्ठा रखते हैं। भले ही सार्वजनिक चर्चाओं में उनका नाम कम आता हो, लेकिन वे संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं।
- गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई – वर्तमान में ईरान के न्यायपालिका प्रमुख एजेई पूर्व खुफिया अधिकारी भी रह चुके हैं। सुरक्षा तंत्र और राजनीतिक अभिजात वर्ग में उनके मजबूत संबंध उन्हें अहम दावेदार बनाते हैं।
क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों की सभा की संभावित बैठक और आधिकारिक घोषणा पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। नए सुप्रीम लीडर का चयन ईरान की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ पश्चिम एशिया के क्षेत्रीय समीकरणों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल देश और दुनिया आधिकारिक पुष्टि और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
