•हरिनाम संकीर्तन ही मोक्ष का सरल मार्ग : आचार्य रमोज वत्स महाराज।
बस्ती। नगर पंचायत गायघाट के गाना स्थित शिक्षा शक्ति सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा परिसर भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर रहा। कथा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन-अर्चन के साथ हुआ।

अयोध्या से पधारे कथावाचक पंडित आचार्य श्री पंडित रमोज वत्स जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। चौथे दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था तथा भगवान के विभिन्न अवतारों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया।
कथावाचक ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने बताया कि कलियुग में हरिनाम संकीर्तन ही मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है।
इस अवसर पर आचार्य हरिहर प्रसाद शुक्ला, सोमनाथ शुक्ला, ऋतुराज पाठक और कमलेश शास्त्री ने मुख्य यजमान कुशलावती त्रिपाठी को विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। श्रद्धालु “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयघोष के साथ झूमते नजर आए। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि युवाओं ने सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर से सायंकाल तक चल रही है तथा अंतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की।
इस अवसर पर बालकृष्ण त्रिपाठी, पिंटू त्रिपाठी, हरिकृष्ण त्रिपाठी, डब्लू त्रिपाठी, सुनील कुमार त्रिपाठी (कानूनगो), रामकृष्ण त्रिपाठी, प्रधानाचार्य आनंद मोदनवाल, विजय शंकर मिश्रा, सुनील कुमार छोटू, अध्यक्ष राकेश मिश्रा, रामकृष्ण मिश्रा, देवनाथ मिश्रा, दुर्गेश मिश्रा, सुरेश तिवारी, संतोष अग्रहरि, लवकुश चौधरी, राजू सोनी, शंकर मिश्रा, निखिल श्रीवास्तव, राघवेंद्र पांडेय, शक्ति शरण उपाध्याय, पुष्कर मिश्र, उत्तम मिश्रा, राकेश चौधरी, जान पांडेय, पंकज शुक्ला, आलोक त्रिपाठी, हरिशंकर त्रिपाठी, बृजेश श्रीवास्तव सहित नगर पंचायत के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जिले के तमाम श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। चारों ओर “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा।
