•बजट बाद वेबिनार में बोले प्रधानमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्रों में नवाचार पर दिया जोर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट के बाद आयोजित वेबिनार श्रृंखला के चौथे वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवाओं की विकसित होती सोच देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसी भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को भी आगे बढ़ाने की जरूरत है। इस वेबिनार का विषय “सबका साथ, सबका विकास – जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति” था।
प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का स्वागत करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना केवल एक विषय नहीं, बल्कि इस बजट का मूल उद्देश्य और सरकार का संकल्प है। उन्होंने बजट घोषणाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी से ठोस सुझाव देने का आग्रह किया।
देखभाल अर्थव्यवस्था और प्रशिक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर उभर रही ‘देखभाल अर्थव्यवस्था’ (Care Economy) और देखभालकर्ताओं की बढ़ती मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को इस क्षेत्र के लिए तैयार करने हेतु नए प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए साझेदारी और नवाचार के सुझाव देने का आग्रह किया।
टेलीमेडिसिन की बढ़ती पहुंच
प्रधानमंत्री ने दूरस्थ क्षेत्रों तक टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने इसके उपयोग को और आसान बनाने तथा आम लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
शिक्षा को जोड़ा जाए वास्तविक अर्थव्यवस्था से
प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति ऐसी शिक्षा प्रणाली की नींव रखती है, जो बाजार की मांगों और वास्तविक अर्थव्यवस्था के अनुरूप हो। उन्होंने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना जरूरी है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया और शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
एसटीईएम में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर गर्व व्यक्त किया और भविष्य की तकनीकों में बेटियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि देश में ऐसा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जहां युवा शोधकर्ताओं को नए विचारों पर प्रयोग करने और नवाचार करने के लिए पूरा अवसर मिले।
पर्यटन और संस्कृति से बढ़ेगा रोजगार
प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन में पर्यटन और संस्कृति की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक स्थलों के साथ-साथ नए पर्यटन स्थलों का विकास किसी भी शहर की ब्रांडिंग और समग्र विकास को गति देता है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित गाइड, आतिथ्य कौशल, डिजिटल कनेक्टिविटी और सामुदायिक भागीदारी पर्यटन क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ बन रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छता और सतत विकास को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने संस्थानों, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए विश्वास जताया कि इस तरह के विचार-विमर्श विकसित भारत की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
