•विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान ने किया”शिक्षा में रंगमंच का महत्व” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन।
प्रयागराज। ‘विश्व रंगमंच दिवस’ के अवसर पर शुक्रवार को विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान द्वारा “शिक्षा में रंगमंच का महत्व” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष अभिलाष नारायण ने की, जबकि सचिव अजय मुखर्जी ने मंचासीन अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की।
संगोष्ठी में डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि रंगमंच का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के सर्वांगीण (हॉलिस्टिक) विकास का आधार है। शिक्षित व्यक्ति ही समाज की नींव होता है और शिक्षा में रंगमंच को शामिल करने का अर्थ है— आगामी पीढ़ी को सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करना। डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने नाटक की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और ज्ञान के मेल से ही एक पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण होता है। आज के दौर में ‘थिएटर एजुकेशन’ बच्चों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि बिना व्यक्तित्व विकास के किसी भी प्रकार का कौशल विकास अधूरा है।
मुख्य वक्ता डॉ. मुकेश उपाध्याय ने ‘शिक्षा में रंगमंच’ और ‘बाल रंगमंच’ के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट किया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ रंगकर्मी व भारतेन्दु नाट्य अकादमी के पूर्व छात्र शिव गुप्ता ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित प्रबुद्ध जनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान के पदाधिकारियों सहित शहर के नाट्य प्रेमी और छात्र उपस्थित रहे।
