•डीएम के आदेश के बाद भी झूठी जांच रिपोर्ट लगाकर शिकायतें निस्तारित, ग्रामीणों का टूटा भरोसा
सुलतानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही जीरो टॉलरेंस नीति पर भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। दुबेपुर ब्लॉक सहित कई गांवों में विकास कार्यों में घोटाले की शिकायतें जिलाधिकारी तक पहुंचीं, मगर जिम्मेदार अधिकारियों ने इन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह पर आरोप है कि वे बिना जांच किए, केवल “टेलीफोन पर शिकायतकर्ता से वार्ता” का हवाला देकर शिकायतें निस्तारित कर रहे हैं।
गांव में घोटाले, डीएम तक पहुंची शिकायतें
दुबेपुर ब्लॉक के लौहर पश्चिम गांव निवासी अनिल यादव ने शपथ पत्र के साथ डीएम को शिकायत दी थी कि गांव में बिना कार्य कराए लाखों रुपये का भुगतान ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और ब्लॉक अधिकारियों की मिलीभगत से कर लिया गया। मनरेगा, हैंडपंप, नाली और खरंजा जैसे कामों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। इसी तरह चकरपुर गांव निवासी सुजीत कुमार ने आरोप लगाया कि हैंडपंप मरम्मत के नाम पर करीब 10 लाख रुपये हजम कर लिए गए। 40 से अधिक लोगों के नाम पर रिबोर दिखाकर धन का दुरुपयोग किया गया। वहीं, महाजीतपुर गांव निवासी दिलेश्वर ने भी विकास कार्यों में भारी अनियमितता का आरोप लगाया।
जांच अधिकारी बने उद्यान अधिकारी, लेकिन…
डीएम के आदेश पर इन मामलों की जांच डीपीआरओ ने जिला उद्यान अधिकारी को सौंपी। लेकिन उद्यान अधिकारी ने गांव जाने की बजाय केवल “शिकायतकर्ता से दूरभाष पर बात” का हवाला देते हुए सभी शिकायतों को निस्तारित कर दिया। न तो वे कभी गांव पहुंचे, न ही शिकायतकर्ताओं से मिले।
एक ही फार्मूले से निस्तारित हर शिकायत
आरोप है कि जिला उद्यान अधिकारी हर शिकायत में एक जैसी आख्या रिपोर्ट लगाते हैं। उनकी कार्यशैली घोटालेबाजों को खुला संरक्षण देने वाली मानी जा रही है। बताया जाता है कि लेन-देन कर घोटालेबाजों को बचाने में पूरी ताकत झोंकी जाती है।
ग्रामीणों का टूटा विश्वास
ग्रामीणों का कहना है कि वे सीएम की जीरो टॉलरेंस नीति और डीएम कुमार हर्ष की सख्ती पर भरोसा करके शिकायत करते हैं, लेकिन जब जांच ही फर्जी हो तो न्याय कैसे मिलेगा? अब शिकायतकर्ताओं का पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रशासन से विश्वास उठता जा रहा है।
बड़ा सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी के आदेश पर भी घोटाले की जांच फर्जी रिपोर्टों में दफ्न कर दी जा रही है, तो मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का हश्र आखिर क्या होगा?
