लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित किया गया। सदन ने उत्तर प्रदेश नगर निगम संशोधन अधिनियम 2026 तथा उत्तर प्रदेश नगर पालिका संशोधन अधिनियम को पारित करते हुए मानव गरिमा और समानता की दिशा में कदम बढ़ाया।मंत्री ए के शर्मा ने सदन में कहा कि कुष्ठ रोग एक गैर-संक्रामक और पूर्णतः इलाज योग्य रोग है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 115 के खंड (ड)(i) तथा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 8 के खंड 2(i)(b) में प्रयुक्त “कुष्ठाश्रम” शब्द को विलोपित किया गया है। उनके अनुसार यह शब्दावली कुष्ठ रोग से प्रभावित अथवा स्वस्थ हो चुके व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण मानी जाती रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में उच्चतम न्यायालय द्वारा भी राज्यों को ऐसे भेदभावपूर्ण शब्दों को कानूनों से हटाने के निर्देश दिए गए थे। उसी क्रम में राज्य सरकार ने यह संशोधन लाकर सामाजिक न्याय और संवेदनशील प्रशासन की प्रतिबद्धता दर्शाई है।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कुष्ठ रोगियों की देखभाल, उपचार और पुनर्वास के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी स्तर पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसे व्यक्तियों के साथ समान सम्मान और संवेदनशीलता का व्यवहार किया जाए।
इस अवसर पर आगरा से विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, हाथरस से विधायक मंजुला सिंह माहौर और रायबरेली से विधायक अशोक कुमार ने इस पहल का स्वागत करते हुए मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।सदन में पारित यह संशोधन विधिक सुधार के साथ-साथ सामाजिक चेतना और समावेशी शासन की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
