‘•सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, अगली सुनवाई 11 मार्च को।
नई दिल्ली। मिडिल स्कूल की एक पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय शामिल किए जाने को लेकर केंद्र सरकार में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर नाराजगी जताई और विषयवस्तु की उपयुक्तता पर सवाल उठाए।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने पूछा कि कक्षा 8 के विद्यार्थियों को न्यायिक भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील विषय के बारे में किस संदर्भ और उद्देश्य से पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि ऐसी सामग्री की मॉनिटरिंग और मंजूरी किस स्तर पर की गई।
मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा और अनुमोदन तंत्र को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कम उम्र के छात्रों के लिए तैयार की जाने वाली सामग्री में संतुलन और आयु-उपयुक्तता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। विवादित अध्याय में न्यायपालिका के समक्ष लंबित मामलों का बोझ, न्यायाधीशों की कमी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि न्यायाधीश आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो अदालत के भीतर और बाहर दोनों स्थानों पर उनके आचरण को नियंत्रित करती है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई प्रारंभ की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य वैध आलोचना को दबाना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि छात्रों के समक्ष विषय किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से बिना शर्त माफी की बात कही, लेकिन शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि संबंधित पत्र में स्पष्ट रूप से माफी का उल्लेख नहीं है। अदालत ने कहा कि इस आयु वर्ग के छात्रों को पक्षपातपूर्ण या असंतुलित सामग्री से परिचित कराना उचित नहीं है, क्योंकि इससे गलत धारणाएं विकसित हो सकती हैं। अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है।
एनसीईआरटी ने रोका वितरण
इस बीच, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) ने अपनी वेबसाइट से संबंधित पुस्तक हटाते हुए उसका वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया है। परिषद ने बयान जारी कर कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है और इसे संविधान का संरक्षक मानती है। साथ ही, इस प्रकरण को अनजाने में हुई त्रुटि बताया गया है।
फिलहाल मामला समीक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विवादित अध्याय में संशोधन किया जाएगा या उसे पूरी तरह हटाया जाएगा।
