गोरखपुर। साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए गोरखपुर पुलिस ने सात अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर अवैध धन का लेनदेन करता था, तथा कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से संगठित धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था।
पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से भारी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद सामान में 10 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट, 2 लैपटॉप, 8 कूटरचित मोहरें, 28 हस्ताक्षरयुक्त चेक, 4 पासबुक, 3 एटीएम कार्ड तथा 2 चेकबुक शामिल हैं।यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देश पर साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी कैंट के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक एम्स के नेतृत्व में थाना स्थानीय पुलिस टीम ने मुकदमा संख्या 76/2026 में धारा 318(4), 351(3), 336, 338, 340, 341, 3(5), 61(2) बीएनएस एवं 66D आईटी एक्ट के तहत सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार अभियुक्तों में ध्रुव साहनी, सूरज सिंह, अजय उपाध्याय, अखंड प्रताप सिंह उर्फ विक्की सिंह, बृजेंद्र कुमार सिंह, अभिषेक कुमार यादव और अमर कुमार निषाद शामिल हैं।वादी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसे पैसों की आवश्यकता थी, लेकिन बैंक से ऋण नहीं मिल सका।
इसी दौरान उसकी मुलाकात ध्रुव साहनी से हुई, जो “रियल होम फाइनेंस” नाम से कार्यालय संचालित करता था। अभियुक्त ने वादी का क्रेडिट स्कोर खराब बताकर लोन देने से मना कर दिया, लेकिन सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर उसके बैंक खातों से संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और लिंक सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लिए।
कुछ समय बाद वादी के खाते में मामूली रकम “सरकारी लाभ” बताकर भेजी गई। इसी प्रकार दूसरे अभियुक्त सूरज सिंह ने भी सरकारी योजना का झांसा देकर बैंक खातों की पूरी जानकारी हासिल कर खातों का दुरुपयोग किया।
बाद में वादी को ई-मेल के माध्यम से सूचना मिली कि उसके खाते के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज होने के कारण खाता फ्रीज कर दिया गया है। बैंक जांच में खुलासा हुआ कि वादी के खाते से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया, जिसकी उसे कोई जानकारी नहीं थी।
पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और चेकबुक अपने पास रख लेते थे और उन्हीं खातों के माध्यम से साइबर ठगी व अवैध लेनदेन करते थे।
गिरोह द्वारा लोन और अन्य सरकारी औपचारिकताओं के नाम पर राजस्व विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों की कूटरचित मोहरें, और फर्जी दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, सभी गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
