•शिकायतों के बाद हरकत में आया प्रशासन, स्वच्छता व गुणवत्ता मानकों में कमी के संकेत; शहर की खाद्य पहचान पर उठे सवाल।
लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ की पहचान रहे प्रसिद्ध ब्रांड टुंडे कबाबी एक बार फिर विवादों में है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) से जुड़े दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित इसके पांच आउटलेट्स पर खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमीनाबाद, अलीगंज, हुसैनाबाद, हरदोई रोड और गोमती नगर स्थित आउटलेट्स के खिलाफ जांच के बाद एफएसडीए ने अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपों में स्वच्छता की कमी, खाद्य गुणवत्ता में लापरवाही तथा नियामकीय मानकों का पालन न करना शामिल है।
शिकायतों से खुला मामला
इस प्रकरण को उजागर करने में सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा की अहम भूमिका रही। उन्होंने संबंधित विभागों को लगातार शिकायतें भेजकर आरोप लगाया कि कई आउटलेट्स पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी।
शिकायतों में यह भी दावा किया गया कि कुछ उपभोक्ताओं को कथित रूप से फूड प्वाइजनिंग का सामना करना पड़ा और उन्हें निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा। साथ ही स्थानीय अधिकारियों पर समय पर कार्रवाई न करने के आरोप भी लगाए गए।
सीएम पोर्टल के बाद तेज हुई कार्रवाई
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर मामला मुख्यमंत्री पोर्टल पर दोबारा उठाया गया, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। इसके बाद संबंधित आउटलेट्स का निरीक्षण किया गया, खाद्य नमूनों की जांच कराई गई और पांच स्थानों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
उर्वशी शर्मा ने इस कार्रवाई के लिए योगी आदित्यनाथ का आभार जताया, हालांकि इसे प्रारंभिक कदम बताते हुए व्यापक जांच की मांग भी की।
“पूर्ण अनुपालन तक संघर्ष जारी रहेगा”
उर्वशी शर्मा का कहना है कि जब तक खाद्य सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक आम नागरिकों और पर्यटकों की सेहत जोखिम में बनी रहेगी। उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए केंद्र और राज्य स्तर पर शिकायतें भेजने की बात कही।
शहर की पहचान पर असर की आशंका
टुंडे कबाबी को लखनऊ की खानपान विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में लगे आरोप न केवल स्थानीय प्रतिष्ठा बल्कि प्रदेश और देश की छवि को भी प्रभावित कर सकते हैं।
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला खाद्य सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बन सकता है।
यह प्रकरण अब एक प्रतिष्ठान से आगे बढ़कर जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग कितनी सख्ती से कार्रवाई करते हैं और क्या आम जनता को सुरक्षित खाद्य वातावरण सुनिश्चित हो पाता है।
