बल्दीराय-सुलतानपुर। तहसील क्षेत्र के सुखबडेरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य मोहन शास्त्री जी महाराज ने मौजूद श्रोताओं को श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मायारूपी जीवन अंत समय में मोक्ष को प्राप्ति होती है।
कथा में बताया कि देवकी की आठवीं संतान के रुप में जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब वासुदेव व देवकी की बेड़ियां खुल गई और सारे द्वारपाल गहरी निंद्रा में सो गये उसी समय वासुदेव श्रीकृष्ण को लेकर मथुरा पहुंचे व नंदबाबा के यहां श्री कृष्ण को छोड़ नंद के यहां पैदा हुई पुत्री को वापस लेकर फिर बंदीगृह पहुंच गये।
वहीं जब आठवीं संतान पैदा होने की सूचना कंस को मिली तो कंस ने पहुंचकर आठवीं संतान कन्या देखकर मारना चाहा तो फिसल कर उड़ गई। जो की विंध्याचल पर्वत पर विराजमान हैं। जिसे आज विन्ध्वासिनी के नाम से जाना जाता है। कथा के समय भक्ति मय भजनों से पूरा प्रांगण झूम उठा। श्री कृष्ण भगवान की झांकी निकाली गई।
इसी के साथ उक्त दिन की कथा का समापन किया तत्पश्चात मुख्य यजमान राज किशोर शुक्ला व क्रांती शुक्ला ने व्यासपीठ की आरती उतारी व प्रसाद वितरण कराया तथा आये हुए श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर दिनेश शुक्ला, पवन दूबे एडवोकेट राम बहादुर सिंह, राजकरन शुक्ला, सुधाकर शुक्ला, उमेश सिंह, अमित पांडेय, राम मूर्ति चौरसिया, क्षितिज शुक्ला, दीलीप पांडेय, गोलू पांडेय, आशाराम पांडेय आदि लोग मौजूद थे।
