श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन एक और इतिहास रचने जा रहा है, जो आम आदमी के जीवन में संचार का तरीका पूरी तरह बदल देगा। इसरो बुधवार सुबह 8:54 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक 2’ सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए तैयार है।
इस मिशन को इसरो के सबसे भारी और शक्तिशाली रॉकेट एलवीएम-3 (LVM3-M6) के जरिए अंजाम दिया जाएगा, जिसे अपनी जबरदस्त क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ भी कहा जाता है। इस लॉन्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में एक मोबाइल टॉवर की तरह काम करेगा, जिससे भविष्य में पहाड़ों की चोटियों, घने जंगलों, रेगिस्तान और यहां तक कि बीच समंदर में भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या खत्म हो जाएगी।
अंतरिक्ष में तैनात होगा मोबाइल टॉवर
यह सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन की दुनिया में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है। अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल द्वारा विकसित किया गया ब्लूबर्ड ब्लॉक 2 सैटेलाइट, पारंपरिक उपग्रहों से बिल्कुल अलग है। यह अंतरिक्ष में पहुंचते ही अपना 223 वर्ग मीटर का विशाल फेज़्ड एरे एंटीना खोलेगा, जो लो-अर्थ ऑर्बिट में अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन एंटीना होगा। इसका वजन करीब 6,500 किलोग्राम है। यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में एक ‘पावरफुल सेल टॉवर’ के रूप में काम करेगा। इसकी मदद से बिना किसी अतिरिक्त उपकरण या सैटेलाइट फोन के, आपके सामान्य 4G और 5G स्मार्टफोन पर सीधे सिग्नल पहुंच सकेगा।
कैसे काम करेगी यह तकनीक
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आपका स्मार्टफोन जमीन पर मौजूद किसी मोबाइल टॉवर की रेंज से बाहर चला जाएगा, तो वह अपने आप अंतरिक्ष में मौजूद ब्लूबर्ड सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट हो जाएगा। इसके लिए यूजर को अपने फोन में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी। सैटेलाइट फोन से भेजे गए कमजोर सिग्नल को भी पकडऩे में सक्षम है और उसे वापस धरती पर मौजूद गेटवे स्टेशन तक भेजता है, जहां से कॉल या डेटा आपके मोबाइल नेटवर्क तक पहुंचता है। यह सैटेलाइट 120 मेगा बिट्स प्रति सेकंड तक की इंटरनेट स्पीड देने में सक्षम है, जिससे वीडियो स्ट्रीमिंग और कॉलिंग बिना किसी रुकावट के हो सकेगी।
इसरो और अमेरिका का दूसरा बड़ा सहयोग
यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग का एक और बेहतरीन उदाहरण है। इससे पहले जुलाई में इसरो ने नासा के साथ मिलकर निसार (हृढ्ढस््रक्र) मिशन लॉन्च किया था। एलवीएम-3 का यह नौवां मिशन और इसरो का कुल 101वां लॉन्च होगा। साल 2025 में भारतीय स्पेस एजेंसी का यह पांचवां मिशन है। फिलहाल इस सेवा की शुरुआती कवरेज अमेरिका में होगी, लेकिन बाद में इसे वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। अगर यह मिशन सफल रहता है, तो दुनिया के उन दूरदराज इलाकों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच सकेगी, जहां टॉवर लगाना अब तक नामुमकिन था।
