•200 से अधिक सीसी कैमरों की खंगाली फुटेज नहीं मिला सुराग।
पुलिस की तमाम कोशिशें शूटर कानून की पहुंच से हैं बाहर।
सैकड़ों संदिग्धों से की जा चुकी पूछताछ नतीजा निकला सिफर।
बस्ती। चर्चित सोखा हत्याकांड को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद बाइक सवार शूटर अभी भी कानून की पहुंच से बाहर हैं। पुलिस की पांच विशेष टीमें दिन-रात एक कर रही हैं, सैकड़ों संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन नतीजा अब तक शून्य’ ही रहा है। 12 दिनों बाद भी कातिलों का सुराग न मिलना दुबौलिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सीसी कैमरों का जाल भी नाकाम पड़ गया है। मामले की तफ्तीश में जुटी दुबौलिया पुलिस व विशेष टीमों ने घटनास्थल से लेकर शूटरों के आने-जाने के रास्तों तक लगे लगभग 200 से अधिक सीसी कैमरों की फुटेज को खंगाला है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ कैमरों में संदिग्ध बाइक सवार नजर आए हैं, लेकिन रात का समय, धुंधली तस्वीर और हेलमेट के कारण उनकी पहचान पुख्ता नहीं हो पा रही है। पुलिस अब फेस रिकग्निशन तकनीक और डंप डेटा का सहारा ले रही है ताकि वारदात के समय क्षेत्र में लगे संबंधित कंपनियों के मोबाइल टावर पर सक्रिय मोबाइल नंबरों का मिलान किया जा सके।
यह था सोखा हत्याकांड
दुबौलिया के खूनीपुरवा बेमहरी गांव में 26 दिसंबर की रात तकरीबन पौने नौ बजे बाइक सवार बदमाश आते हैं सोखा को सोते समय उनके घर पर गोली मार कर फरार हो जाते है। घटना की सूचना लगते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मौके पर पुलिस अधीक्षक अभिनन्दन ने रात में ही घटना स्थल का जायजा लिया। दिवंगत सोखा के स्वजन से बातचीत की। उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिलाया। हत्याकांड के दूसरे दिन सोखा के बेटे रमेश की तहरीर पर पुलिस ने दिवंगत के चेले गंगाराम निवासी मटेरा, नगर व रामसंवारे निवासी खलवा, दुबौलिया और तीन बाइक सवार शूटरों पर मुकदमा दर्ज कर लिया था।
जांच के मुख्य बिंदु और चुनौतियां:
पुलिस कप्तान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच विशेष टीमों का गठन किया है। इनमें सर्विलांस, स्वाट, एसओजी की टीमें पुराने अपराधियों के रिकार्ड खंगालने और दो टीमें जमीनी सूचनाएं जुटाने में लगी हैं। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या यह हत्या किसी पुरानी रंजिश का नतीजा है या इसके पीछे किसी अपराधिक गैंग का हाथ है। सोखा के पास आने वाले क्लाइंट्स और उनके पुराने विवादों की कुंडली भी खंगाली जा रही है।
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घटना स्थल पर साक्ष्यों का अभाव:
हमलावरों ने वारदात को इतनी सफाई से अंजाम दिया कि मौके पर कोई पुख्ता फोरेंसिक साक्ष्य नहीं मिला। दिवंगत के स्वजन का धैर्य जवाब देने लगा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मृतक के स्वजन और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घरवालों का आरोप है कि पुलिस केवल आश्वासन दे रही है, जबकि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि असली शूटरों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे घेराव करेंगे।
हम मामले के बहुत करीब हैं। कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं जिन पर काम किया जा रहा है। अपराधियों को पाताल से भी खोज निकाला जाएगा। जनता से अपील है कि वे धैर्य रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
:-संजय सिंह, सीओ कलवारी, बस्ती
