बस्ती। गौरा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुस्तकालय एवं वाचनालय में रविवार को रंगों और कल्पनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला, जहाँ बच्चों की तूलिका ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली तथा युवा विकास समिति, बस्ती द्वारा संचालित 15 दिवसीय जागरूकता अभियान के ग्यारहवें दिन आयोजित आर्ट एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से महिला सम्मान, समानता और अधिकारों की प्रभावशाली तस्वीर प्रस्तुत की।
“राइट्स, जस्टिस, एक्शन – फॉर ऑल विमेन एंड गर्ल्स” थीम पर आधारित इस प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने अपने बड़े विचारों को रंगों के माध्यम से सजीव रूप दिया। किसी चित्र में बेटी को शिक्षा के प्रकाश के साथ अपने सपनों की ऊँची उड़ान भरते दिखाया गया, तो कहीं महिलाओं को समाज और नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर परिवर्तन की मशाल प्रज्वलित करते हुए उकेरा गया। कई चित्रों में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हुए दर्शाया गया, जिसने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
प्रतियोगिता के दौरान पुस्तकालय परिसर मानो रंगों की एक जीवंत प्रदर्शनी में परिवर्तित हो गया, जहाँ प्रत्येक कैनवास अपने भीतर एक सशक्त संदेश और बेहतर समाज की झलक समेटे हुए था। बच्चों की रचनात्मकता और संवेदनशील सोच ने यह प्रमाणित किया कि नई पीढ़ी न केवल सपने देखती है, बल्कि उन्हें सकारात्मक सामाजिक दिशा देने की क्षमता भी रखती है।
कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट चित्र बनाने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों में सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता विकसित करती हैं और उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करती हैं।
पुस्तकालय के मैनेजर शशांक शुक्ल ने कहा कि बच्चों की पेंटिंग्स यह दर्शाती हैं कि आने वाली पीढ़ी महिला सम्मान और समानता के मूल्यों को गहराई से समझ रही है और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं माधुरी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी कला के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण विषयों पर विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं, जो उनके व्यक्तित्व विकास और सामाजिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
