प्रयागराज। संगम की रेती पर रविवार की संध्या जब कलाकारों के पाँव मंच पर थिरके, तो दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। रंग, धुन और पारंपरिक परिधानों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विराटता सजीव रूप में प्रतिबिंबित होती रही।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘चलो मन गंगा–यमुना तीर’ कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सुर, लय और ताल की अनुपम जुगलबंदी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जवाबी बिरहा से हुआ, जिसमें लोक कलाकारों ने बिरहा गायन के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके पश्चात अनूप बनर्जी ने “लय यात्रा” की विशेष प्रस्तुति देकर संगीत की अंतर्निहित लय और जीवन के गणितीय क्रम को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
इसके बाद आरोही सिंह एवं साथी कलाकारों ने राधा-कृष्ण की रासलीला पर आधारित नृत्य नाटिका “रोको ना डगर मेरो श्याम” तथा फाग गीतों की प्रस्तुति देकर फाग रस का अनुभव कराया। वहीं गीता सिराड़ी एवं दल द्वारा उत्तराखंड के छपेली नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन मनोज कुमार ने किया।
