अयोध्या। जनपद के मसौधा ब्लाक में आयोजित हिंदू सम्मेलन में समाज, संस्कृति, पर्यावरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर समरस, स्वाभिमानी और कर्तव्यनिष्ठ भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता आनंद सोनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “हिंदू धर्म कोई संकीर्ण पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र कला है।” उन्होंने कहा कि विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए भारत में हिंदू समाज का एकजुट रहना आज नितांत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत एक शरीर है तो हिंदू उसकी आत्मा हैं और यह संबंध सनातन काल से चला आ रहा है।
कार्यक्रम में वक्ता राष्ट्रीय सेविका समिति खंड कार्यवाहिकी रूपा पाठक जी ने सामाजिक समरसता पर विचार रखते हुए कहा कि “एक पनघट और एक मरघट पर सभी भेद समाप्त हो जाते हैं, यही समरसता का वास्तविक स्वरूप है।”
उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेना हमारा सौभाग्य है और प्रत्येक परिवार को वर्ष में कम से कम एक बार धार्मिक स्थलों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि परिवार को एकजुट रखने और धार्मिक-सांस्कृतिक संस्कार देने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक घर में ओम और स्वस्तिक जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान, तुलसी का पौधा, स्वदेशी परिधान और मातृभाषा में संवाद होना चाहिए।
उन्होंने भोजन के समय मोबाइल के स्थान पर पारिवारिक संवाद को प्राथमिकता देने, परिवार के साथ धार्मिक यात्राएँ करने और प्रातःकाल धरती माता के चरण स्पर्श जैसे संस्कारों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए समाजसेवी सरदार भीम सिंह ने कहा कि भारत के गुलाम होने के मुख्य कारण समाज की आत्मविस्मृति, संगठन और अनुशासन का अभाव तथा स्वाभिमान की कमी रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आज आवश्यकता है स्वदेशी अपनाने की, अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने की तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को समझने की।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि संघ ने उपेक्षा, विरोध और संघर्ष के अनेक दौर देखे हैं, फिर भी वह निरंतर समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ता रहा है। भविष्य के भारत के निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आधार बनाकर कार्य करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि हिंदुत्व मानवता, करुणा, प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण पर आधारित एक सनातन विचारधारा है। संगठित, स्वाभिमानी और संस्कारयुक्त समाज ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर कर सकता है।
कार्यक्रम का संचालन पुष्कर दत्त तिवारी द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन श्री खंड कार्यवाह अरुण तिवारी ने किया। इस अवसर पर खंड संघचालक अशोक सिंह,सह संघचालक धर्मेन्द्र कुमार पाठक,लोकेश द्विवेदी,राम प्रकाश पाठक, जनविजय सिंह,राम दुलारे गुप्ता,दुर्गा शुक्ला,राजेश चौधरी,रामसागर चौहान,धर्मवीर सिंह, वीरसेन सिंह, अरुण पांडेय,राहुल द्विवेदी,भरत चौधरी सहित मसौधा खंड के विभिन्न समाजों के प्रमुख मंच पर उपस्थित रहे।
