प्रयागराज। शहादत इमाम हुसैन के बाद बीमारे करबला व चौथे इमाम ज़ैनुल आबेदीन को हांथों में हथकड़ी व पैरों में बेड़ीयां व गले में खारदार तौक़ डाल कर जो अज़ीयत लश्करे यज़ीदी ने दी थी उसकी याद में माहे मोहर्रम की पच्चीसवीं को दरियाबाद में तहफ्फुज़े अज़ा सोसायटी की ओर से इमामबाड़ा नवाब बेगम बड़ा घर के विशाल मैदान में दहकते अंगारों पर नंगे पैर चल कर मातम किया गया।
नजीब इलाहाबादी के संचालन में नायाब बलियावी व चंदन सान्याल फैज़ाबादी ने पेशख्वानी तो हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना क़िरतास करबलाई साहब क़िबला लखनऊ ने शहादत ए इमाम ए ज़ैनुल आबेदीन पर ढ़ाए गए ज़ुल्मो सितम की दास्तां बयां किया। इमाम जुमा सैय्यद हसन रज़ा ज़ैदी साहब क़िब्ला की सदारत में खतीबे अहलेबैत अशरफ अब्बास खान ने तक़रीर की। मेंहदी हसन ने खुसूसी नौहा पढ़ा।बड़ा घर सहित मैदान की सभी लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी और लोहबान की धूनी में ताबूत इमाम ज़ैनुल आबेदीन निकाला गया। वहीं ग़ाज़ी अब्बास का अलम मुबारक भी साथ साथ रहा।
नौजवान हांथों में लाल हरे झण्डे लहराते हुए जुलूस की शक्ल में दहकते अंगारों पर नंगे पांव चल कर मातम करते रहे। वहीं अन्जुमनों के सदस्यों ने एक साथ तेज़ धार की छूरीयों से लैस ज़ंजीरों से पुश्तज़नी की। आयोजक व तहफ्फुज़े अज़ा सोसायटी के सदस्य यासिर सिबतैन के अनुसार दो सौ रुपए की मोमनीन की काटी गई रसीद का क़ुर्राअंदाज़ी से तीन नाम निकाले गए जिन्हें इराक़ व ईरान में रौज़ों की ज़ियारत को भेजा जाएगा।
वहीं दूसरा बड़ा आयोजन शफक़त अब्बास पाशा के संचालन में चक ज़ीरो रोड पर इमामबाड़ा डिप्यूटी ज़ाहिद हुसैन में हुआ जहां फैज़ान आब्दी ने सोज़ व मर्सिया पढ़ा तो अर्शी रिज़वी ने पेशख्वानी की।
अन्जुमन अब्बासिया रानीमंडी ने नौहा व मातम का नज़राना पेश किया।शबीहे ताबूत की जियारत भी कराई गई। पार्षद फसाहत हुसैन,यासिर सिब्तैन, नजीब इलाहाबादी, मशहद अली खान, अहसन रज़ा, नय्यर आब्दी, ज़फ़र रज़ा, अरशद नक़वी आदि शामिल रहे।
