नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस विधेयक के तहत अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में औपचारिक मान्यता प्रदान की गई है। यह निर्णय लंबे समय से चल रहे राजधानी विवाद को समाप्त करने और ग्रीनफील्ड राजधानी परियोजना को कानूनी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विधेयक को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में प्रस्तुत किया। कांग्रेस सहित अधिकांश दलों ने इसका समर्थन किया, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया। पार्टी का कहना था कि अमरावती के लिए अपनी भूमि देने वाले किसानों से किए गए वादों को पूरा करने हेतु विधेयक में स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भावुक संबोधन में इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अमरावती तेलुगु समाज की स्वप्निल राजधानी है और राज्य के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने अपनी भूमि त्यागने वाले किसानों और शांतिपूर्ण आंदोलनों में भाग लेने वाली महिलाओं के योगदान की सराहना की।
अमरावती एक नियोजित ग्रीनफील्ड राजधानी परियोजना है, जिसके लिए किसानों ने स्वेच्छा से 34,000 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराई है, जबकि कुल मिलाकर लगभग 54,000 एकड़ भूमि परियोजना हेतु अधिग्रहित की गई है। इस शहर को आधुनिक ‘ब्लू-ग्रीन’ मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 56,000 करोड़ रुपये की लागत से 91 परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें सड़कों, सरकारी भवनों और बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है।
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत 2014 में तेलंगाना के गठन के बाद हैदराबाद को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी के रूप में अधिकतम 10 वर्षों के लिए निर्धारित किया गया था। इस अवधि के पश्चात आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी स्थापित करनी थी, जिसके लिए अमरावती का चयन किया गया।
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