नई दिल्ली। देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू हो गया है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में हाउस लिस्टिंग (मकानों की गिनती) और आवास संबंधी आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। गौरतलब है कि यह जनगणना मूल रूप से 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना होगी, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार आजादी के बाद पहली बार जाति संबंधी आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे। साथ ही, प्रत्येक घर की लोकेशन डिजिटल मैप पर दर्ज की जाएगी, जिससे भविष्य की योजनाओं और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
जनगणना कार्य में लगभग 30 लाख कर्मचारी लगाए जाएंगे। डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लीकेशन और निगरानी के लिए केंद्रीकृत पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ और एचएलबी क्रिएटर वेब मैप एप्लिकेशन का सहारा लिया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना की तिथियां अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। कुछ प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं—
- अंडमान-निकोबार, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम: 16 अप्रैल से 15 मई
- गुजरात, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव: 20 अप्रैल से 19 मई
- उत्तराखंड: 25 अप्रैल से 24 मई
- मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा: 1 से 30 मई
- बिहार: 2 से 31 मई
- तेलंगाना: 11 मई से 9 जून
- पंजाब: 15 मई से 13 जून
- महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान, झारखंड: 16 मई से 14 जून
- उत्तर प्रदेश: 22 मई से 20 जून
- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पुडुचेरी: 1 से 30 जून
- हिमाचल प्रदेश: 16 जून से 15 जुलाई
- केरल, नागालैंड: 1 से 30 जुलाई
- तमिलनाडु, त्रिपुरा: 1 से 30 अगस्त
- असम: 17 अगस्त से 15 सितंबर
- मणिपुर: 1 से 30 सितंबर
- पश्चिम बंगाल: तिथि अभी निर्धारित नहीं
इस बार स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया गया है। नागरिक स्वयं वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा और फील्ड सर्वे से 15 दिन पहले शुरू किया जाएगा।
जनगणना के दौरान नागरिकों से कुल 33 प्रकार की जानकारी एकत्र की जाएगी। इनमें भवन संख्या, मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, लिंग और जाति, मकान का स्वामित्व, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल और प्रकाश के स्रोत, शौचालय की उपलब्धता, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, तथा रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल और वाहनों जैसी सुविधाओं के स्वामित्व से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे।
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