रिपोर्ट: पवन कुमार रस्तोगी।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अहर्ता परीक्षा (PET) में पूर्व-घोषित कॉमन कट-ऑफ की मांग को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की ओर लगातार अपनी आवाज उठाई जा रही है।
इसी क्रम में सोमवार को प्रतियोगी छात्रों का एक समूह बीजेपी व अन्य पार्टी के जनप्रतिनिधियों से मिला और ज्ञापन सौंपा।
मा० सांसद माननीय पुष्पेंद्र सरोज (कौशांबी) एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव माननीय इंद्रजीत सरोज से संयुक्त रूप से मिलकर छात्रों ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया। माननीयों द्वारा छात्रों की मांगों को जायज मानते हुए मांगों का समर्थन किया और सहयोग का आश्वासन दिया गया।


इसके अतिरिक्त प्रतियोगी छात्रों की ओर से अनुपम सिंह ने माननीय बीजेपी विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी प्रयागराज (शहर उत्तरी) व कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी को भी न्यूनतम कट-ऑफ निर्धारित किए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा।

अभ्यर्थियों का कहना है कि PET एक स्क्रीनिंग अथवा अहर्ता परीक्षा है, जिसका उद्देश्य केवल योग्य अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा तक पहुंचाना है, न कि अंतिम चयन करना। बावजूद इसके, PET की न्यूनतम कट-ऑफ न तो पहले से तय की जाती है और न ही घोषित की जाती है, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव बना रहता है। नई भर्तियों के विज्ञापन जारी होने पर अभ्यर्थियों को यह स्पष्ट नहीं होता कि वे मुख्य परीक्षा के लिए पात्र होंगे या नहीं, जिससे आवेदन शुल्क, समय और परिश्रम की अनावश्यक बर्बादी होती है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में केवल अत्यधिक अंक प्राप्त करने वाले सीमित अभ्यर्थियों को बार-बार मुख्य परीक्षा का अवसर मिलता है, जबकि औसत अंक प्राप्त करने वाले, विशेषकर गरीब, ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थी वंचित रह जाते हैं।
अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की तर्ज पर PET में भी पूर्व-घोषित कट-ऑफ लागू करने की मांग की। साथ ही, PET परीक्षा को नियमित रूप से आयोजित कराने और अन्य भर्ती एजेंसियों के साथ परीक्षा तिथियों का समन्वय करने की मांग भी उठाई गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रतियोगी छात्र मोनू पांडेय, अनुपम सिंह, हर्ष कुमार झा, संदीप सिंह सहित अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने विश्वास जताया कि सरकार एवं आयोग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए PET प्रणाली को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और अभ्यर्थी-हितैषी बनाएंगे।
