लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ० पंकज त्रिपाठी ने प्रदेश के किसानों से मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि फसलों से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए मिट्टी में जीवांश कार्बन की पर्याप्त उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में प्रदेश की मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा केवल 0.2 से 0.3 प्रतिशत रह गई है, जिसे बढ़ाकर 0.8 से 1 प्रतिशत तक ले जाने की आवश्यकता है।
कृषि निदेशक ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया और डीएपी के अत्यधिक प्रयोग तथा गर्मी के मौसम में जुताई न करने के कारण मिट्टी से मित्र कीट और केंचुए तेजी से समाप्त हो रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव मिट्टी की उर्वरता और फसलों के उत्पादन पर पड़ रहा है, जिसके चलते उर्वरकों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
डॉ० पंकज त्रिपाठी ने जानकारी दी कि दलहनी और गैर-दलहनी फसलों को उनकी वानस्पतिक वृद्धि के समय मिट्टी में दबाने की प्रक्रिया को हरी खाद कहा जाता है। इसके लिए ढैंचा, सनई, लोबिया, ग्वार और मक्का जैसी फसलों का चयन किया जा सकता है। इन फसलों की जड़ों में उपस्थित जीवाणु वातावरण की नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने का कार्य करते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता में स्वाभाविक वृद्धि होती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वर्ष में कम से कम एक बार इन फसलों की बुवाई कर 30 से 40 दिन के भीतर इन्हें मिट्टी में पलट देना चाहिए। इससे मृदा में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ेगी, सूक्ष्म जीवों की सक्रियता में वृद्धि होगी तथा नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि अप्रैल और मई की भीषण गर्मी में खेतों को हरी खाद की फसलों से ढकने से भूमि के ऊसर बनने की आशंका कम हो जाती है और आगामी फसलों की तैयारी के लिए भूमि उपयुक्त बनी रहती है। इस दिशा में किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा ढैंचा और मिश्रित हरी खाद के बीज के पैकेट 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
कृषि निदेशक ने किसानों से अपील की कि वे कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर इस योजना का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि हरी खाद के प्रयोग से न केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी और दीर्घकाल में मृदा की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
