बस्ती: दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद के आईएआरआई पूसा संस्थान नवोन्मेषी किसान कॉन्क्लेव–2025’ में जिले के प्रगतिशील किसान राम मूर्ति मिश्र द्वारा किये जा रहे कृषि में नवाचारों से देश के किसानों को रूबरू कराने व प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बागवानी, महिला किसानों का सशक्तिकरण, समूह गतिशीलता एवं उद्यमिता, कृषि यंत्रीकरण, तथा किसान नवाचारों के सत्यापन और प्रसार की रणनीतियाँ जैसे विषयों पर अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया है।
बस्ती सदर ब्लाक के गौरा गाँव के रहने वाले राममूर्ति मिश्र प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती में अहम् स्थान रखते हैं। वह सुगन्धित धान, गन्ना, सब्जी, खेती में नवाचार को लेकर किसानों आगे बढ़ाने में भी अहम् भूमिका निभा रहें हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें प्राकृतिक खेती के एक्सपर्ट ट्रेनर के रूप में भी मान्यता प्रदान की गई है। उन्होंने अभी तक सैकड़ो महिला किसानों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग देने का काम किया है।
खेती में दिए जा रहे उनके योगदान को लेकर भारत सरकार के भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा उन्हें जिला, मंडल, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार खेती में दिए जा रहे योगदान को लेकर प्रदान किया जा चुका है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा परिसर में ही दो दिवसीय कॉन्क्लेव 23–24 दिसंबर 2025 को आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ। एम।एल। जाट, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, ICAR द्वारा किया जाएगा। जिसमें देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किसान इस मंच पर भाग लेंगे, जो इसे राष्ट्रीय स्तर का जीवंत संवाद बनाएगा।
राम मूर्ति मिश्र को सम्मानित किसान नवप्रवर्तक किसान के तौर पर इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है जो अपने खेतों में विकसित नवाचार, अनुभव और सफलताओं को देशभर से आए अन्य किसानों के साथ साझा करेंगे—ताकि किसान-से-किसान सीख (Farmer-to-Farmer Learning) की सशक्त परंपरा को नई गति मिल सके। कॉन्क्लेव के दूसरे दिन, 24 दिसंबर को श्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, किसानों से रू-बरू होंगे और उनके अनुभवों, चुनौतियों तथा नवाचारों पर संवाद करेंगे। यह संवाद नीति और ज़मीनी अनुभवों के बीच सेतु का कार्य करेगा। संस्थान के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डॉ। आर। एन। पडारिया के अनुसार, कॉन्क्लेव में छह तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें ‘IARI नवोन्मेषी किसान कॉन्क्लेव–2025’ न केवल किसानों की रचनात्मक शक्ति को पहचान देगा, बल्कि उनके नवाचारों को मुख्यधारा में लाकर समावेशी, टिकाऊ और नवाचार-आधारित भारतीय कृषि की दिशा में एक मजबूत कदम सिद्ध होगा।
