लखनऊ/गोवा। गोवा के पणजी स्थित एक प्रमुख होटल में आयोजित विकसित गोवा विषयक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सुषमा खर्कवाल, महापौर लखनऊ सम्मिलित हुईं। यह सम्मेलन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट द्वारा अपने स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
उद्घाटन सत्र में गोवा के ऊर्जा एवं नवीन ऊर्जा मंत्री आर.एम. धवलीकर सहित विभिन्न शहरों के महापौर, जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।अपने संबोधन में महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब देश के शहर मजबूत और आत्मनिर्भर बनें।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में शहरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि शहर आर्थिक गतिविधियों, रोजगार, नवाचार और निवेश के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए शहरों को सुव्यवस्थित, टिकाऊ और समावेशी बनाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए बेहतर आधारभूत ढांचा, सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता व्यवस्था, जल प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना आवश्यक है। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल विकास को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।
लखनऊ के अनुभव साझा करते हुए महापौर ने बताया कि राजधानी को वर्ष 2047 की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। क्षेत्रीय विकास की नई अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है तथा हरित मार्ग और बाहरी परिधि मार्ग जैसी योजनाओं के माध्यम से यातायात और प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शहर में दो हजार से अधिक विद्युत चालित वाहनों के माध्यम से घर-घर से कूड़ा एकत्र किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है।
महापौर ने बताया कि लखनऊ को शून्य अपशिष्ट शहर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है और प्रतिदिन लगभग दो हजार मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। पुराने कचरे के निस्तारण के साथ भविष्य में कचरे से ऊर्जा उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।
पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा विशेष पद्धति से शहरी वन विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही हरित क्षेत्रों का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लखनऊ जैसे ऐतिहासिक शहर में विकास के साथ-साथ विरासत संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। हज़रतगंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों की पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक शहरी ढांचे विकसित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अर्थव्यवस्था, सुदृढ़ता, पर्यटन और विरासत जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें विभिन्न शहरों के विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य की शहरी चुनौतियों तथा संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
अंत में महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश के शहर स्वच्छ, हरित, सशक्त और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किए जाएंगे।
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