•गुरु वशिष्ठ रामायण कथा का हवन-भंडारे के साथ समापन, कवि सम्मेलन व सांस्कृतिक संध्या ने बाँधा समां।
•यूजीसी नियम के बहाने सत्ता के भेडिये जातिवाद उत्पन्न कर रहे हैं
•भारत में जातियां थी लेकिन जातिवाद कभी नहीं था
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ आश्रम, बढ़नी मिश्र में आयोजित गुरु वशिष्ठ रामायण कथा के नौवें दिन कथा को विराम देते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने श्रीराम वनवास, चित्रकूट सभा, सीता हरण, लक्ष्मण मूर्छा सहित अनेक प्रसंगों की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र बनकर रहेगा और भारत में जातियां तो थीं, लेकिन जातिवाद कभी नहीं था। आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियमों के बहाने सत्ता के लोग जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।


कथा क्रम में उन्होंने कहा कि श्रीराम ने निषादराज और शबरी को सम्मान देकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को बौद्ध, ईसाई और मुसलमान नहीं होने दिया जाएगा तथा 80 प्रतिशत भारतीय हिंदू ही रहेंगे। उनकी इच्छा है कि भारत “हिंदुस्थान” बने।
दशरथ मरण, चित्रकूट सभा, चरण पादुका के महत्व, भरत-हनुमान संवाद और रावण के आतंक जैसे प्रसंगों पर शोधपरक व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान के भजन के बिना जीवन की जलन समाप्त नहीं होती। चित्रकूट को भजन के लिए सबसे पवित्र स्थान बताते हुए कहा कि जीवात्मा को परमात्मा से मिलने के लिए महात्मा की शरण में जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वे मखौड़ा धाम भी गए थे और अब बढ़नी मिश्र सहित सभी तीर्थों का विकास होगा।
तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने गुरु वंदना की। मुख्य यजमान चंद्र भूषण मिश्रा और कथा संयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि गुरु कृपा से बढ़नी मिश्र में विश्व की पहली महर्षि वशिष्ठ कथा हवन और भंडारे के साथ सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष नीलम सिंह राना, तहसीलदार वीर बहादुर सिंह, ब्लॉक प्रमुख यशोवर्धन सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन का आयोजन
कथा से पूर्व वरिष्ठ कवि डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन हुआ। संचालन विनोद उपाध्याय ने किया। डॉ. वी.के. वर्मा, महेश श्रीवास्तव, दीपक सिंह प्रेमी, राजेश मिश्र, शिवा त्रिपाठी, वेद प्रकाश प्रचण्ड, शैलजा पाण्डेय, तेज प्रकाश शुक्ल, अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, अभिषेक श्रीवास्तव, सुशील सिंह कथिक आदि कवियों ने धार्मिक एवं ओजपूर्ण रचनाएँ प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या में ‘राम विवाह’ की मनमोहक प्रस्तुति
रामकथा शुभारंभ से पूर्व भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के खानदान की 13वीं पीढ़ी से जुड़े कलाकार अनुप और नेहा ने कथक शैली में ‘राम विवाह’ प्रसंग प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वयंवर से विवाह तक के प्रसंगों को भावपूर्ण मुद्राओं और घुंघरुओं की मधुर ताल पर जीवंत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया। नौ दिवसीय रामकथा का समापन विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठानों, हवन और भंडारे के साथ भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
