रिपोर्ट: पवन कुमार रस्तोगी।
लखनऊ। पीईटी 2025 में न्यूनतम कटऑफ अथवा न्यूनतम परसेंटाइल निर्धारित किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में स्पष्टता, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने पहला सवाल उठाया कि पीईटी 2025 को अर्हता (एलिजिबिलिटी) परीक्षा माना जाए या प्रारंभिक परीक्षा; इस पर आयोग अथवा सरकार स्पष्ट जवाब दे। उनका कहना है कि यदि पीईटी प्रारंभिक परीक्षा है तो क्या एक ही प्रारंभिक परीक्षा के आधार पर विभिन्न स्तर की कई मुख्य परीक्षाएं कराई जानी चाहिए? छात्रों ने तर्क दिया कि इसी परीक्षा के जरिए लिपिकीय (बाबू) स्तर की भर्तियों के साथ-साथ अधिकारी स्तर (लोअर पीसीएस) की परीक्षाओं में भी प्रवेश दिया जा रहा है, जो परीक्षा की प्रकृति पर प्रश्न खड़ा करता है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि पीईटी को केवल एलिजिबिलिटी टेस्ट माना जाता है, तो इसमें न्यूनतम कटऑफ अथवा न्यूनतम परसेंटाइल क्यों निर्धारित नहीं किया गया है? इसे क्वालीफाइंग नेचर का बनाया जाना चाहिए, जैसा कि UPTET, CTET, CSAT तथा हरियाणा की सीईटी जैसी परीक्षाओं में मानक तय हैं।
छात्रों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में केवल 1 से 2 प्रतिशत अभ्यर्थियों को ही बार-बार विभिन्न मुख्य परीक्षाओं में अवसर मिल पा रहा है, जो न्यायोचित नहीं है। उन्होंने “अधिकतम लोगों के लिए अधिकतम अवसर” की अवधारणा को अपनाते हुए न्यूनतम परसेंटाइल तय करने की मांग की, ताकि प्रदेश के 20 से 25 लाख पीईटी अभ्यर्थियों को समान अवसर और न्याय मिल सके।
ज्ञापन सौंपने वालों में संदीप सिंह, अनुपम सिंह, खुशबू त्रिपाठी, नेहा मिश्रा, अमन यादव सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे। छात्रों ने आशा जताई कि सरकार एवं आयोग इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेकर स्पष्ट नीति घोषित करेंगे, जिससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
