•अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक साझेदारी।
लखनऊ। रेलवे और धातुकर्म क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार एवं क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आज अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ), गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी), वडोदरा तथा सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सोमवार को हस्ताक्षर किए गए।
इस रणनीतिक सहयोग का उद्देश्य देश के प्रमुख रेलवे अनुसंधान संस्थान, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स के उभरते विशिष्ट विश्वविद्यालय तथा अग्रणी धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाना है, जिससे रेलवे क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति मिल सके।
एमओयू के अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा तथा प्रयोगशाला एवं परीक्षण सुविधाओं का साझा उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही मानकों एवं विशिष्टताओं के विकास, कार्यशालाओं, सेमिनारों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर भी विशेष जोर रहेगा।
यह सहयोग भारतीय रेलवे के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों—जैसे सामग्री क्षरण, विफलता की रोकथाम और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने—के समाधान में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर आरडीएसओ के महानिदेशक श्री प्रभास दनसाना, जीएसवी के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी तथा एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी रेलवे संचालन में सुरक्षा, दक्षता और स्थिरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
यह पहल स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को सशक्त बनाने, तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को साकार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
