लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 450 दिन पूरे होने पर शुक्रवार को प्रदेशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।
संघर्ष समिति के नेतृत्व में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने एक स्वर में निजीकरण के निर्णय की वापसी तक शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले 450 दिनों से आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से चलाया जा रहा है। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक और मनमानी कार्रवाइयाँ की गईं, जिससे कर्मियों में असंतोष है।
उन्होंने मांग की कि निजीकरण का निर्णय वापस लेने के साथ-साथ आंदोलन के दौरान की गई सभी दंडात्मक कार्रवाइयाँ भी तत्काल निरस्त की जाएं।
संघर्ष समिति ने इसे एक अनूठा आंदोलन बताते हुए कहा कि बिजली कर्मचारी उपभोक्ताओं और किसानों को साथ लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन के बावजूद बिजली आपूर्ति और शिकायत निस्तारण को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
समिति ने चेतावनी दी कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से किसानों और आम उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बिजली दरों में वृद्धि, सेवा गुणवत्ता में गिरावट और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
आंदोलन के 450 दिन पूरे होने के अवसर पर वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, कानपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बरेली, अयोध्या, झांसी और बांदा सहित अनेक जिलों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए गए। इस दौरान बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं और किसानों से संपर्क कर निजीकरण के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया।
संघर्ष समिति ने दोहराया कि यह आंदोलन उपभोक्ताओं के हित, किसानों के भविष्य और प्रदेश की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की सुरक्षा के लिए है, और जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
