•प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा, दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलन की चेतावनी।
•जिले से लेकर दिल्ली तक लड़ी जाएगी शिक्षकों के सम्मान की लड़ाई – चन्द्रिका सिंह’
बस्ती। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को जिले के हजारों शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद शिक्षक पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।


प्रदर्शन का नेतृत्व टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने किया, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर सेवारत शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किए जाने की मांग उठाई। शिक्षकों का कहना था कि 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार के 2017 के शासनादेश के क्रम में सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि सभी शिक्षक नियुक्ति के समय निर्धारित मानकों और परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर सेवा में आए थे। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इस निर्णय से लाखों परिवारों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
धरने को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रिका सिंह ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान की लड़ाई जिले से लेकर दिल्ली तक लड़ी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण शिक्षक आज हाशिए पर हैं।
जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विष्णु दत्त शुक्ल ने इसे संकट का समय बताते हुए सभी शिक्षकों से एकजुट होकर इस “काले कानून” के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया। जिलामंत्री बालकृष्ण ओझा, जिला कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव और रवीश मिश्र ने कहा कि दिल्ली में विशाल धरने की रणनीति बनाई जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक रामलीला मैदान में जुटकर आंदोलन करेंगे।
धरने को सीनियर शिक्षक संघ, सेवानिवृत्त शिक्षक संघ एवं शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारियों समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों को टीईटी से मुक्ति नहीं मिली तो शिक्षक और उनके परिवार लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने को बाध्य होंगे।।
धरने का संचालन समीउल्लाह अंसारी ने किया। प्रदर्शन और पैदल मार्च में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी शामिल रहे।
