गोरखपुर। भारतीय रेल में सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इस संबंध में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि ‘कवच’ को वर्ष 2020 में नेशनल ऑटोमेटिक प्रोटेक्शन सिस्टम घोषित किया गया था और अब इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 3,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर ‘कवच’ लागू किया जा चुका है, जबकि करीब 20,000 किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है। साथ ही लगभग 8,000 लोकोमोटिव में इस प्रणाली को स्थापित करने की योजना पर भी कार्य जारी है।
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘कवच’ केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, टेलीकॉम टावर, डेटा सेंटर और ऑनबोर्ड उपकरण शामिल हैं। इसकी संरचना एक पूर्ण दूरसंचार नेटवर्क की तरह कार्य करती है।
पूर्वोत्तर रेलवे में भी इस प्रणाली को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत 1,441 रूट किलोमीटर रेलमार्ग पर ‘कवच’ प्रणाली लगाने के लिए 492.21 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की जा चुकी है।
विभिन्न मंडलों के प्रमुख रेलखंडों- लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर में ‘कवच’ लगाने का कार्य स्वीकृत किया गया है। प्रथम चरण में 551 रूट किलोमीटर पर कार्य किया जाएगा, जिसमें सीतापुर सिटी-बुढ़वल, बुढ़वल-गोरखपुर कैंट, बाराबंकी-बुढ़वल और गोरखपुर कैंट-गोल्डिनगंज जैसे महत्वपूर्ण खंड शामिल हैं।
इन रेलखंडों पर 108 टेलीकॉम टावर स्थापित किए जाने हैं, जिनका सर्वे पूरा हो चुका है। वर्तमान में छपरा-बाराबंकी रेलखंड पर टावर लगाने का कार्य जारी है, जबकि गोरखपुर-बस्ती खंड पर 20 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
रेल प्रशासन के अनुसार ‘कवच’ प्रणाली लागू होने से ट्रेनों का संचालन और अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय होगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावनाओं में कमी आएगी।
