लखनऊ। केन्द्र सरकार द्वारा व्यापार एवं वाणिज्य को सुव्यवस्थित एवं विनियमित करने के उद्देश्य से अधिनियमित विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 दिनांक 01 अप्रैल 2011 से प्रभावी है। ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा को और सुदृढ़ करने तथा निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने जनविश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023 पारित किया है। इस अधिनियम के अंतर्गत विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के अंतर्गत आने वाले कई लघु अपराधों को डिक्रिमिनलाइज़ करते हुए दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त किया गया है और उनके स्थान पर अर्थदंड की राशि में वृद्धि की गई है, जिससे एक ओर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके और दूसरी ओर सामान्य जनहित भी सुरक्षित रहे।
जनविश्वास अधिनियम-2023 के क्रम में उत्तर प्रदेश विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली, 2011 की अनुसूची में संशोधन प्रस्तावित किया गया है। इसी संदर्भ में प्रदेश के हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियाँ प्राप्त करने के उद्देश्य से नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में 03 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक के दौरान प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तावित संशोधनों की प्रत्येक धारा पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण किया गया। इस पर गहन विचार-विमर्श करते हुए व्यापारिक संगठनों से नियमों को अधिक व्यवहारिक, पारदर्शी एवं व्यापार-अनुकूल बनाने के लिए उनके सुझाव एवं आपत्तियाँ आमंत्रित की गईं।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि संशोधित नियम व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने के साथ-साथ उपभोक्ता हितों की भी प्रभावी सुरक्षा कर सकें।इस अवसर पर फिक्की लखनऊ, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, उद्योग व्यापार मंडल, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन, फ्लोर मिल एसोसिएशन सहित प्रदेश के कई प्रमुख व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, नायरा एनर्जी लिमिटेड, एचपीसीएल सहित विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में सहभागिता की।
विधिक माप विज्ञान विभाग की ओर से उपनियंत्रक लखनऊ जोन, उपनियंत्रक कानपुर जोन, सहायक नियंत्रक लखनऊ मंडल सहित अन्य अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों के आधार पर प्रस्तावित संशोधनों को अंतिम रूप देकर आगे की कार्यवाही की जाएगी, जिससे प्रदेश में विधिक माप विज्ञान से संबंधित प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक सरल, प्रभावी और व्यापार-अनुकूल बनाया जा सके।
