भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आर्थिक रूप से सक्षम पत्नी द्वारा मेंटेनेंस (भरण-पोषण) की मांग उचित नहीं मानी जा सकती। अदालत ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए याचिका को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
‘मांस नोचने’ जैसी मांग: कोर्ट
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने प्रसिद्ध साहित्यिक संदर्भ देते हुए कहा कि यह मांग ऐसी प्रतीत होती है, जैसे किसी के शरीर से मांस का टुकड़ा मांगना। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
महिला की आय पर्याप्त
अदालत ने पाया कि महिला की मासिक आय एक लाख रुपये से अधिक है, जिससे वह अपना जीवन-यापन आसानी से कर सकती है। साथ ही, दंपति का कोई बच्चा भी नहीं है, जिसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी हो। कोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस का प्रावधान केवल उन मामलों में लागू होता है, जहां पत्नी आर्थिक रूप से निर्भर हो।
फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार
इससे पहले 18 फरवरी 2026 को फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया था कि तलाक की प्रक्रिया पूरी होने तक महिला को कोई मेंटेनेंस नहीं दिया जाएगा। हाई कोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
दोनों पक्षों के तर्क
महिला ने अपनी याचिका में बताया कि वह नौकरी करती हैं और पहले उनकी वार्षिक आय लगभग 20 लाख रुपये थी, जबकि पति की आय 30 लाख रुपये से अधिक है। बाद में उन्होंने अपनी आय घटकर करीब 14 लाख रुपये सालाना बताई। इसके बावजूद कोर्ट ने माना कि यह आय उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है।
अदालत का स्पष्ट संदेश
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि मेंटेनेंस का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर या आश्रित जीवनसाथी को सहारा देना है, न कि पहले से सक्षम व्यक्ति को अतिरिक्त लाभ प्रदान करना।
