•रवि शंकर प्रसाद ने भी विपक्ष पर साधा निशाना, परिसीमन और आरक्षण को लेकर उठाए सवाल।
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला।
स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संसद में महिलाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को नजरअंदाज किया और अपने रुख से “क्रूर चेहरा” उजागर किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर केवल दावे किए, लेकिन दशकों तक ठोस परिणाम नहीं दिए।
उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक करोड़ों महिलाएं बुनियादी सुविधाओं—जैसे शौचालय और बैंक खातों से वंचित रहीं, जबकि भाजपा-एनडीए सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें जेंडर बजट फ्रेमवर्क की शुरुआत भी शामिल है।
ईरानी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने गंभीरता नहीं दिखाई और इसे राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश की।
वहीं, रवि शंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि महिलाओं को “इस्तेमाल” करने जैसी भाषा अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की सोच को दर्शाता है, जिसकी भाजपा कड़ी निंदा करती है।
संवैधानिक पहलुओं पर बात करते हुए प्रसाद ने स्पष्ट किया कि लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्समायोजन के लिए परिसीमन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिना परिसीमन के सीटों में बदलाव संभव नहीं है और महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया भी इससे जुड़ी हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने की बात कही गई है, ताकि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वह विधेयक का समर्थन करती है, वहीं दूसरी ओर परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, जो संविधान और व्यवस्था पर अविश्वास को दर्शाता है।
समापन में भाजपा नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सत्ता का नहीं, बल्कि महिलाओं को समान अधिकार देने का है, और पार्टी इस दिशा में प्रतिबद्ध है।
