पवन कुमार रस्तोगी।
प्रयागराज। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत्) के शुभारंभ के साथ चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन जिले में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रमुख शक्ति पीठ अलोपी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।
मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। अलोपी देवी मंदिर में विशेष सजावट, दुर्गा सप्तशती पाठ और आरती के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि से सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का शुभारंभ किया था, इसलिए इसे नवसंवत्सर का प्रथम दिवस माना जाता है। भारतीय पंचांग के अनुसार विक्रम संवत् प्रकृति, ऋतु चक्र और ग्रह-नक्षत्रों की गति पर आधारित है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।
वसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति भी नवजीवन का संदेश दे रही है। वृक्षों पर नई कोपलें, आम की मंजरियों की सुगंध और शीतल समीर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रही है।
इस अवसर पर प्रसिद्ध धर्माचार्य पंडित श्री मोहित मिश्र जी (भक्ति मार्ग परिवार) ने कहा,
“चैत्र शुक्ल प्रतिपदा केवल नववर्ष का आरंभ नहीं, बल्कि सृष्टि के नवजागरण का प्रतीक है। नवरात्रि के ये नौ दिन आत्मशुद्धि, साधना और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर हैं। हमें अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर कर धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए।”
चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन घर-घर में कलश स्थापना कर अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई। श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास, पूजा और साधना के माध्यम से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे।
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। प्रशासन द्वारा मंदिरों में सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
