गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उभरती हुई तकनीक हमारे कार्यों और विकास की गति को नई उड़ान दे सकती है। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमें उभरती हुई तकनीक का उपयोग करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। प्रत्येक क्षेत्र में इसके प्रयोग की अपार संभावनाएं हैं। तकनीक युवाओं के जीवन को किस प्रकार गति दे सकती है, यह वर्तमान समय में तकनीक की बढ़ती रफ्तार से स्पष्ट देखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश/2047’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री तथा टाटा संस एवं टाटा समूह के अध्यक्ष एन. चन्द्रशेखरन ने विश्वविद्यालय के पंचकर्म केन्द्र का निरीक्षण किया तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को प्रतीकात्मक चेक, प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही ‘सभी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता जागरूकता’ कार्यक्रम में योगदान देने वाले विद्यार्थियों तथा ‘किसानों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों को भी प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर तथा चिकित्सा नवाचार केन्द्र, राजकीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान, ग्रेटर नोएडा के मध्य सहमति पत्र का आदान-प्रदान भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक तेज गति से समाधान दे सकती है, बशर्ते उसके अनुरूप रणनीति बनाकर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में मौतें होती थीं। पिछले 40 वर्षों में 50 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से चर्चा कर विभिन्न स्थानों से आंकड़े एकत्र किए गए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से यह पता चला कि यह बीमारी उन क्षेत्रों में अधिक थी, जहां स्वच्छता और शुद्ध पेयजल का अभाव था। इसके बाद चिन्हित बस्तियों में शौचालय निर्माण और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई, जिसके परिणामस्वरूप इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में बालिकाओं का विद्यालय छोड़ने का प्रतिशत 19 से 20 प्रतिशत था, जो एक बड़ी चुनौती थी। राज्य सरकार ने निःशुल्क शिक्षा, वर्दी, बैग, पुस्तकें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराने के साथ ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाया। आंकड़ों के विश्लेषण से विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल और शौचालय की कमी को प्रमुख कारण पाया गया। इसके समाधान के बाद विद्यालय छोड़ने की दर घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कृषि क्षेत्र में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। इसके माध्यम से वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि खेत में कब और कितनी मात्रा में उर्वरक तथा पानी देना है तथा किस समय गुड़ाई और कटाई करनी है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से प्रदेश के किसानों ने कृषि विकास दर को 7 से 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाया है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 से 2017 के बीच 17 वर्षों में गन्ना किसानों को 2 लाख 4 हजार करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि वर्ष 2017 से 2025 के बीच लगभग साढ़े आठ वर्षों में 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तकनीक के उपयोग से गन्ना पर्ची को ऑनलाइन किए जाने से किसानों की घटतौली और दलाली जैसी समस्याएं समाप्त हुईं और उन्हें समय से भुगतान सुनिश्चित हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग और बढ़ाने की आवश्यकता है। टेलीकंसल्टेशन जैसी व्यवस्थाओं से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला अस्पतालों के माध्यम से अधिकांश मरीजों का उपचार संभव होगा तथा केवल गंभीर मामलों को ही उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक कृषि और चिकित्सा आपात स्थितियों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। ड्रोन के माध्यम से कम समय में खेतों में दवा का छिड़काव किया जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर रक्त या अन्य आवश्यक सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक शीघ्र पहुंचाया जा सकता है।
कानपुर और नोएडा में ड्रोन तकनीक के उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर तथा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में चिकित्सा तकनीक से जुड़े उत्कृष्टता केन्द्र विकसित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टाटा संस एवं टाटा समूह के अध्यक्ष एन. चन्द्रशेखरन ने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेना उनके लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो विज्ञान, वित्त, स्वास्थ्य, औषधि और सतत विकास सहित अनेक क्षेत्रों में नवाचार और नए समाधान प्रदान करेगी।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वैज्ञानिक, चिकित्सक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
