•35% तक अनुदान, 75,000 नई इकाइयों का लक्ष्य और 15 एग्रो-फूड पार्क—किसानों, उद्यमियों व युवाओं के लिए खुल रहे अवसरों के द्वार
लखनऊ। प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से औद्योगिक विकास की धुरी बनकर उभर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के प्रभाव से राज्य में निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति मिल रही है। इस नीति का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उद्योगों को प्रोत्साहित करना और प्रदेश को निर्यातोन्मुख अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाना है।
प्रदेश में वर्तमान में असंगठित क्षेत्र के तहत लगभग 3.50 लाख इकाइयाँ तथा संगठित क्षेत्र में 80,000 से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनमें से 3000 से अधिक इकाइयों का वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। यह क्षेत्र लगभग 2.55 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रहा है।
सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जनपद में 1000 नई इकाइयों की स्थापना करते हुए 75,000 अतिरिक्त इकाइयाँ स्थापित करना है, जिससे कुल संख्या लगभग 1.40 लाख तक पहुंच सके। साथ ही, राज्य में 15 एग्रो-फूड प्रोसेसिंग पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो निवेश को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
निजी निवेश के माध्यम से कई बड़ी इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। इनमें Haldiram’s (नोएडा/लखनऊ) सहित अन्य प्रमुख उद्योग शामिल हैं। हल्दी, आम, आँवला, मिर्च, नमकीन और दुग्ध प्रसंस्करण जैसे उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का प्रमुख निर्यातक बनकर उभर रहा है।
नीति के अंतर्गत नई इकाइयों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) अनुदान दिया जा रहा है। विस्तार एवं आधुनिकीकरण के लिए 35 प्रतिशत (अधिकतम 1 करोड़ रुपये) सहायता का प्रावधान है। कोल्ड चेन और प्लांट-मशीनरी पर 35 प्रतिशत तथा फ्रीजिंग सुविधा पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 10 करोड़ रुपये) तक अनुदान उपलब्ध है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना पर महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत और पुरुष उद्यमियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। निर्यात परिवहन लागत पर 25 प्रतिशत सब्सिडी तथा कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर व फार्म गेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष वित्तीय सहायता दी जा रही है।
भूमि और शुल्क संबंधी प्रोत्साहनों में भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत, बाह्य विकास शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा स्टांप शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति शामिल है।
उद्यमी सिंगल विंडो पोर्टल “निवेश मित्र” के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर पारदर्शी एवं समयबद्ध स्वीकृति प्राप्त कर सकते हैं। यह नीति किसानों, उद्यमियों और युवाओं को सशक्त बनाते हुए प्रदेश को आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
