शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हर्ष महाजन के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में प्रस्तावित गवाहों के नाम हटाने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने वर्ष 2024 की चुनाव याचिका के संदर्भ में यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act, 1951 की धारा 87(1) के तहत आवेदन दाखिल कर प्रतिवादी द्वारा सूचीबद्ध गवाहों के नाम हटाने का अनुरोध किया था।
याचिका में तर्क दिया गया था कि गवाहों की सूची में शामिल कई नाम, विशेष रूप से क्रम संख्या 2 से 14 तक, अनावश्यक और अस्पष्ट हैं तथा इनका उद्देश्य केवल कार्यवाही में विलंब करना है। साथ ही यह भी कहा गया कि गवाहों की सूची निर्धारित समय सीमा के बाद दाखिल की गई है, जिससे मामले के निपटारे में देरी होगी।
वहीं, प्रतिवादी हर्ष महाजन ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि प्रस्तावित गवाह निर्वाचन प्रक्रिया की वैधता, विशेषकर मतगणना और बराबरी की स्थिति में अपनाई गई प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए आवश्यक हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि मुख्य मुद्दों से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का दायित्व प्रतिवादी पर है और उन्हें अपने बचाव में गवाह पेश करने का वैधानिक अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि पर्याप्त आधार के बिना इस अधिकार में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह सिद्ध करने में असफल रहे कि प्रस्तावित गवाह निरर्थक या केवल कार्यवाही में बाधा डालने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं। केवल विलंब की आशंका के आधार पर गवाहों के नाम हटाना उचित नहीं है।
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तुत गवाहों का संबंध निर्वाचन प्रक्रिया से है, जिनमें मतगणना और वीडियोग्राफी से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल इस आवेदन तक सीमित है और मुख्य चुनाव याचिका के गुण-दोष पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष गवाहों के साक्ष्य दर्ज करने की तिथियां तय करने के लिए निर्धारित की गई है।
