•चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुरुवार, 19 मार्च 2026 से हो रहा नव संवत्सर 2083 का शुभारम्भ।

मुरादाबाद। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव संवत्सर 2083 का शुभारम्भ गुरूवार, 19 मार्च 2026 से हो रहा है। नव संवत्सर का शुभारम्भ भू-गर्भ एवं खगोल विज्ञान पर आधारित है। सनातन धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर भगवान ब्रह्मा जी ने श्रृष्टि का सृजन किया था ।
राज्यपाल से सम्मानित स्वतंत्र लेखक ,चिन्तक एवं पूर्व महामंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा मुरादाबाद पं.राधेश्याम शर्मा ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र एवं देशकाल की सभी भविष्यवाणियों का आंकलन, राशिफल एवं खगोलीय घटनाक्रम की गणना से शुभ अथवा अशुभ योगों का विश्लेषण नव संवत्सर के आधार ही पर किया जाता है।
ग्रेगोरियन कलैंडर के अनुसार नव वर्ष 01 जनवरी से प्रारम्भ होता है, किन्तु ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा की गति के आधार पर नव संवत्सर से नूतन वर्ष का शुभारम्भ माना जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और अगले दिन तक रहेगी। चैत्र नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना के लिए 19 मार्च, गुरूवार को प्रातःकाल 06:26 बजे से 07: 58 बजे तक का शुभ मुहूर्त है ,और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक है । कुछ ज्योतिषाचार्य ने प्रातःकाल 06:52 बजे से 09:44 बजे तक का समय भी शुभ बताया है , जिसमें पंचक और खरमास के प्रभाव के बावजूद पूजा शुभ मानी जाती है।
उदय तिथि के अनुसार गुरूवार को सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत सिद्धि दोनों शुभ योग पर नव संवत्सर का शुभारम्भ हो रहा है । ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस हिंदू नववर्ष के देवगुरु बृहस्पति राजा और मंगल देव मंत्री होंगे।
वहीं इस नववर्ष का नाम रौद्र संवत्सर है, जिसके धान्येश गुरु और बुद्ध, मेघेश चंद्रमा, धनेश गुरु एवं रसेश शनि रहने वाले हैं। ज्योतिष के अनुसार जब देवगुरु बृहस्पति राजा बनते हैं तो धर्म, ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि होती है।
वहीं मंगल मंत्री होने से साहस, ऊर्जा, प्रशासन और निर्णय क्षमता से जुड़े क्षेत्रों में तेजी देखने को मिलती है। इस कारण आने वाला नववर्ष कई क्षेत्रों में तेज निर्णय, नई योजनाओं की शुरुआत और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। नववर्ष की शुरुआत एक बड़े ही दुर्लभ संयोग में होने जा रही है।
नववर्ष की शुरुआत में राजा बृहस्पति के स्वामित्व वाली मीन राशि में चतुर्ग्रही योग रहेगा। सूर्य, चंद्रमा, शुक्र और शनि मिलकर मीन राशि में चतुर्ग्रही योग बनाएंगे। नव संवत्सर सभी प्राणियों के लिए सुख,समृद्धि, विश्व शांति एवं सद्भाव का कारक हो मंगल कामनाऐं।
