जॉब कार्ड के ई-केवाईसी लेबल को मेंटेन करने का ब्लॉक मुख्यालयों पर चल रहा खेल।
•एक्टिव जॉब कार्डों की अचानक घटी संख्या पर खड़ा किया सवाल।
केके मिश्रा संवाददाता।
संतकबीरनगर। मनरेगा में अनियमितताओं का संतकबीरनगर से पुराना नाता रहा है। कभी वित्तीय स्वीकृति पर सवाल उठे, तो कभी उपस्थिति अपलोड करने में फोटो विसंगतियां चर्चा में रहीं। इस बार मामला जॉब कार्ड के ई-केवाईसी से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर जॉब कार्ड डिलीट किए जाने का आरोप सामने आया है।
जॉब कार्ड के ई-केवाईसी को पूरा कराने के शासनादेश के बाद, ब्लॉक मुख्यालयों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में बड़े पैमाने पर जॉब कार्ड हटाने का खेल सामने आया है। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जॉब कार्ड डिलीशन के मामले में संतकबीरनगर जिला ‘चैंपियन’ बन गया। विकास और योजनाओं के क्रियान्वयन में अक्सर फिसड्डी रहने वाला यह जिला अचानक प्रदेश स्तर पर चर्चा में आया तो मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की भी भौंहें तन गईं।
सूत्रों के अनुसार, जिले में एक्टिव जॉब कार्डों की संख्या में आई अचानक गिरावट को लेकर विकास भवन स्तर से जांच के आदेश दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में जहां 1.95 लाख एक्टिव जॉब कार्ड थे, वहीं वर्तमान में इनकी संख्या घटकर 1.92 लाख रह गई है। जॉब कार्ड के ई-केवाईसी के नाम पर हुआ यह खेल अब अधिकारियों की नजरों से छिपा नहीं रह सका है।
विकास खंड कार्यालयों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिन ग्राम पंचायतों में लक्ष्य के अनुरूप ई-केवाईसी नहीं हुई थी, वहां मनरेगा की स्वीकृति से लेकर सभी कार्यों पर रोक लगा दी गई थी। मस्टर रोल जारी रखने की मजबूरी में कुछ ग्राम पंचायतों ने जॉब कार्ड डिलीशन को ही समाधान मान लिया, जो अब जांच के दायरे में आ गया है।
इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने सभी संबंधित ब्लॉकों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। सभी रिपोर्ट मंगाई गई हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित ग्राम पंचायतों के साथ-साथ निगरानी व पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
