•पुरानी पेंशन से लेकर आशा-आंगनबाड़ी तक गूंजा हक का सवाल।
सुल्तानपुर। मजदूरों, कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की समस्याओं को लेकर आज भारतीय मजदूर संघ ने जोरदार आवाज बुलंद की। जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को संबोधित 18 सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिए गए तो व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
संगठन ने आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षा के चलते मजदूर वर्ग अत्यंत संकट में है। आशा, आंगनबाड़ी, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों से लेकर सफाई कर्मचारियों तक हर वर्ग असुरक्षा, वेतन विसंगति और शोषण का शिकार है।
ज्ञापन में मांग की गई कि आशा और आशा संगिनी बहनों को सरकारी कर्मचारी घोषित कर प्रोत्साहन राशि के स्थान पर नियमित मानदेय दिया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों/सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि कर उन्हें भी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई।
एनएचएम के तहत कार्यरत संविदा कर्मियों को बीमा सुविधा देने के लिए केंद्र से बजट मिलने के बावजूद लाभ न मिलने पर भी सवाल उठाए गए। स्थानांतरण का भय दिखाकर शोषण, वेतन विसंगतियां और सेवा सुरक्षा का अभावकृइन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
ज्ञापन में 108 व 102 एंबुलेंस सेवाओं से बर्खास्त कर्मियों की बहाली की मांग करते हुए कहा गया कि वार्ता के बाद भी उन्हें काम पर नहीं लिया गया, जिससे कई परिवार भुखमरी की कगार पर हैं।
संगठन ने कहा कि आउटसोर्सिंग के नाम पर कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता और नौकरी से निकाले जाने का डर हमेशा बना रहता है। उनके लिए स्पष्ट नियमावली बनाई जाए और न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये सुनिश्चित किया जाए। मिड-डे मील कर्मियों का मानदेय 10,000 रुपये करने, सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण और सम्मानजनक वेतन देने की भी मांग की गई।
असंगठित क्षेत्र और पटरी व्यवसायियों की सुरक्षापटरी-रेहड़ी दुकानदारों को स्थायी स्थान देने, पुलिस उत्पीड़न रोकने, ई-रिक्शा व ऑटो चालकों को स्टैंड उपलब्ध कराने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की मांग भी प्रमुख रही।ग्रामीण, दिहाड़ी मजदूर, धोबी, दर्जी, नाई, बढ़ई, लुहार, मोची, कुम्हार समेत असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को मजदूर की श्रेणी में शामिल कर सामाजिक सुरक्षा कवच देने की मांग दोहराई गई।
पुरानी पेंशन और 5 दिवसीय कार्य सप्ताह सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर भी संगठन ने सरकार को घेरा। बैंकिंग उद्योग में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने और सहकारी बैंकों में वेतनमान विसंगतियां दूर करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन के दौरान दिनेश कुमार शुक्ला (विभाग प्रमुख), सतीश चन्द्र मिश्रा, शशांक मोहन शुक्ला (जिलामंत्री), नरेंद्र कुमार मिश्रा, प्रतीक श्रीवास्तव, प्रेम चंद श्रीवास्तव, डॉ. विनय पाल, किरन शुक्ला (जिलाध्यक्ष आशा), गुंजा सिंह, रंजना शर्मा सहित विभिन्न विभागों के दर्जनों कर्मचारी मौजूद रहे। नेताओं ने कहा यह केवल ज्ञापन नहीं मजदूर वर्ग की पीड़ा का दस्तावेज है। यदि शासन ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
