
— राकेश कुमार।
विचार मंथन: पानी प्रकृति का वह अनमोल उपहार है, जिसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं। मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जल से बना है, जो इसकी अनिवार्यता को स्पष्ट करता है। दैनिक जीवन के हर कार्य—पानी पीने में, भोजन बनाने, स्वच्छता और कृषि क्षेत्र में जल की अहम भूमिका है। इसके बावजूद आज विश्व एक गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकता है।
पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा समुद्रों में है, जो खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। शेष 3 प्रतिशत मीठे जल में भी अधिकांश भाग ग्लेशियरों में जमा है, जबकि 1 प्रतिशत से भी कम जल नदियों, झीलों और भूजल के रूप में उपलब्ध है। यही सीमित संसाधन मानव उपयोग के लिए उपलब्ध है, जिसका अत्यधिक दोहन आज चिंता का प्रमुख कारण बन गया है।
भूजल का अनियंत्रित दोहन, अनियमित मानसून और जल प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। नलकूपों और पंपिंग सेटों के अत्यधिक उपयोग से भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। दूसरी ओर, कृषि क्षेत्र में पानी की अत्यधिक खपत और उद्योगों द्वारा जल प्रदूषण ने समस्या को और जटिल बना दिया है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक जल की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो सकती है।
सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य रखा गया है। जल शक्ति अभियान, अटल भूजल योजना, मिशन अमृत सरोवर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और नमामि गंगे कार्यक्रम जैसी पहलें जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है।
हालांकि, केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जल संरक्षण में जनभागीदारी उतनी ही आवश्यक है। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और रिसाव को रोकना जैसे छोटे-छोटे प्रयास बड़े परिणाम ला सकते हैं। घरों में नल का सीमित उपयोग, शावर के बजाय बाल्टी से स्नान, और जल उपकरणों का संतुलित उपयोग जैसे उपाय हर व्यक्ति को अपनाने चाहिए।
इसके साथ ही वृक्षारोपण भी जल संरक्षण में सहायक है, क्योंकि यह भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
स्पष्ट है कि जल संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का अनिवार्य कर्तव्य है। यदि आज हम नहीं चेते, तो आने वाले समय में जल संकट मानव अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
“बचाइए पानी, बचाइए जीवन—प्यासी धरती कर रही पुकार, अब तो जागो हर बार।”
