रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख-सीतापुर। मिश्रिख की नवीन गल्ला मंडी इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही का केंद्र बनी हुई है। अपनी मेहनत की फसल बेचने आए किसान कई दिनों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मंडी परिसर में डेरा डाले हुए हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उत्तम कुमार जैसे कई किसान बुधवार से ही तौल का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अरुण कुमार और सत्यव्रत शुक्ला के वाहन भी लंबे समय से कतार में खड़े हैं। किसानों का आरोप है कि जहां सामान्य किसान अपनी बारी के लिए लंबी लाइन में लगे हैं, वहीं रसूखदार दलालों की ट्रॉलियां बिना इंतजार के सीधे तौल कांटों तक पहुंचाई जा रही हैं। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से किसानों में भारी आक्रोश है और वे मंडी प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव, कागजों में सीमित व्यवस्था
भीषण गर्मी के बीच मंडी में किसानों के लिए पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। शौचालय बने होने के बावजूद उन पर ताले लटके हुए हैं, जिससे किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
हाल ही में एसडीएम अभिनव यादव द्वारा मंडी का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका कोई प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है। शौचालय, जनरेटर और अन्य सुविधाएं केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रही हैं।
वहीं, एएमओ कांति राठौर ने बारिश के बाद आए गेहूं की सैंपलिंग का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि जब तक एफसीआई की टीम द्वारा सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक तौल कार्य सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाएगा। फिलहाल, किसान अव्यवस्थाओं के बीच कठिन परिस्थितियों में इंतजार करने को मजबूर हैं।
