मिश्रिख (सीतापुर)। तहसील मिश्रिख में तैनात तहसीलदार अजीत कुमार जायसवाल के खिलाफ अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मिश्रिख लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजलाल चौधरी ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराते हुए तहसीलदार के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री के साथ ही राजस्व परिषद अध्यक्ष लखनऊ, आयुक्त लखनऊ मंडल और जिलाधिकारी सीतापुर को भी पंजीकृत डाक से भेजी है। शिकायत में उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 12 नवम्बर 2025 को तहसीलदार के खिलाफ एक शिकायती पत्र भेजा था और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच उपजिलाधिकारी द्वारा की गई, लेकिन अधिवक्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण रही, जिसके खिलाफ उन्होंने पुनः कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 4 नवम्बर 2025 को उन्होंने अपनी एक पत्रावली (38/2) तहसीलदार को उनके कक्ष में सौंपी थी, जो बाद में कथित रूप से गायब हो गई। इस संबंध में भी आईजीआरएस पोर्टल और उपजिलाधिकारी से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और शिकायत का निस्तारण औपचारिक रूप से कर दिया गया।
अधिवक्ता का यह भी कहना है कि तहसीलदार के कार्यभार संभालने के बाद से तहसील में भ्रष्टाचार बढ़ा है और अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण का अभाव है। वर्तमान में तहसीलदार न्यायिक का पद करीब तीन वर्षों से रिक्त होने के कारण वही इसका अतिरिक्त प्रभार भी देख रहे हैं।
एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए बताया गया कि “सीमा बनाम रामपाल” वाद 30 दिसम्बर 2021 को निस्तारित हो चुका था। इसके बावजूद 27 अगस्त 2025 को संदीप कुमार द्वारा दायर रेस्टोरेशन प्रार्थना पत्र को तहसीलदार ने 10 नवम्बर 2025 को मार्क किया, जबकि इसे उसी दिन मार्क किया जाना चाहिए था। आरोप है कि करीब तीन माह की देरी कर पद का दुरुपयोग किया गया।
इसके अलावा 30 नवम्बर 2021 के संशोधन आदेश के तहत सीमा पत्नी रामपाल और खुशबू पुत्री रामपाल निवासी अशरफ नगर के नाम खतौनी में दर्ज हुए थे। इनके आधार पर उक्त भूमि (गाटा संख्या 390 आदि) में एक-तिहाई हिस्से का पंजीकृत विक्रय पत्र 26 जुलाई 2025 को आशा रानी पत्नी बृजलाल चौधरी के पक्ष में निष्पादित किया गया। इसके बाद 17 दिसम्बर 2025 को नामांतरण आदेश भी पारित हो गया।
हालांकि, अधिवक्ता का आरोप है कि तहसीलदार ने नियमों को दरकिनार कर एकपक्षीय और विधि विरुद्ध आदेश पारित किया, जो अतार्किक और अनुचित है।
फिलहाल, इन आरोपों पर तहसील प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अधिवक्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
