•गुणवत्ता शिक्षा और डिजिटल नवाचार पर विशेषज्ञों ने रखे विचार।
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देने हेतु “मैनेजमेंट फॉर इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफॉर्मेशन: इनसाइट्स फ्रॉम एनईपी” विषय पर एक दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम का आयोजन गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में किया गया।



कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कविता शाह ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का आधार है और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए नवाचार, गुणवत्ता शिक्षा एवं प्रभावी नेतृत्व आवश्यक है। उन्होंने छात्र-केंद्रित, कौशल आधारित एवं बहुविषयक शिक्षा प्रणाली को अपनाने पर बल दिया।
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सौरभ ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शिक्षा में प्रगति के लिए नवाचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता, अनुशासन और मूल्य आधारित शिक्षा को अपनाने पर जोर दिया। कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार ने प्रशासनिक दक्षता एवं पारदर्शिता को संस्थागत विकास के लिए जरूरी बताया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में विभिन्न विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह ने ‘समर्थ ईआरपी ’ के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी दी। डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने नई शिक्षा नीति के मॉडल फ्रेमवर्क एवं बहुविषयक शिक्षा की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। प्रो. सौरभ ने महाविद्यालयों में गुणवत्ता संवर्धन एवं आईक्यूएसी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, डॉ. अश्विनी कुमार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित पैनल चर्चा में प्रो. दीपक बाबू, प्रो. प्रकृति राय, प्रो. कौशलेंद्र चतुर्वेदी सहित अन्य विशेषज्ञों ने अकादमिक गुणवत्ता और संस्थागत सुधार के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में लगभग 30 राजकीय एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवम शुक्ला एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीप्ती गिरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
