लखनऊ। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट लखनऊ ने स्वयं को एटीएस अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 90 लाख रुपये की ठगी करने वाले तीन शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में अपराध संख्या 23/2026 धारा 318(4), 319(2) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66(डी) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार 26 जनवरी 2026 को वादी की पत्नी वीना बाजपेयी के मोबाइल पर स्वयं को एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर बताने वाले व्यक्ति का फोन आया। कॉलर ने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में संलिप्तता का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद उन्हें सिग्नल ऐप डाउनलोड कर संपर्क में रहने को कहा गया। दूसरे व्यक्ति ने स्वयं को एटीएस अधिकारी बताते हुए कथित जांच, सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और सीजर दस्तावेज दिखाकर विश्वास दिलाया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए खातों की धनराशि सत्यापन हेतु निर्दिष्ट बैंक खातों में ट्रांसफर करनी होगी।
भय और मानसिक दबाव में 29 जनवरी से 9 फरवरी 2026 के बीच आरटीजीएस के माध्यम से विभिन्न खातों में कुल लगभग 90 लाख रुपये स्थानांतरित करा लिए गए। इसके बाद आरोपियों ने 11 लाख रुपये और मांगे तथा असमर्थता जताने पर धमकी दी। जांच में स्पष्ट हुआ कि सुनियोजित तरीके से डिजिटल माध्यमों से लगातार संपर्क रखकर पीड़ित को मानसिक रूप से बंधक बनाकर यह ठगी की गई।पुलिस आयुक्त लखनऊ के निर्देशन में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय), पुलिस उपायुक्त (अपराध) और सहायक पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जांच के दौरान मयंक श्रीवास्तव, इरशाद और मनीष कुमार उर्फ आकाश को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में मयंक ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते वह गिरोह के संपर्क में आया और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया। उसे दिल्ली और नोएडा के होटलों में ठहराकर उसके मोबाइल और बैंक दस्तावेजों का उपयोग साइबर फ्रॉड के लेन-देन में किया गया।
इरशाद ने स्वीकार किया कि वह खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर उनके खाते, चेकबुक और डेबिट कार्ड हासिल करता था। मनीष उर्फ आकाश ने भी गिरोह के लिए काम करने और कमीशन लेने की बात स्वीकार की। जांच में संबंधित खाते में 9 फरवरी 2026 को 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये की संदिग्ध धनराशि आने की पुष्टि हुई, जिसकी शिकायतें एनसीसीआरपी पोर्टल पर तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों से दर्ज पाई गईं।
गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ मॉडल के तहत खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करता था, गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी देता था और डराकर बड़ी रकम ट्रांसफर कराता था। पहली परत के खाते में रकम जमा कर बाद में उसे अन्य खातों में बांट दिया जाता था। पहचान छिपाने के लिए व्हाट्सएप कॉल, फर्जी नाम और अलग-अलग शहरों के होटलों का उपयोग किया जाता था।
पुलिस ने तीन मोबाइल फोन, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक की चेकबुक तथा एक डेबिट कार्ड बरामद किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मयंक श्रीवास्तव निवासी गोरखपुर, इरशाद निवासी गाजियाबाद और मनीष कुमार उर्फ आकाश निवासी दिल्ली शामिल हैं। तीनों से पूछताछ जारी है।
साइबर क्राइम थाना ने अपील की है कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसी किसी भी कॉल से घबराएं नहीं और किसी के कहने पर धनराशि ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
